Khabrilal Live Desk: पटना, 3 सितंबर। Dragon Fruit Farming in Bihar- सारण जिले के दरियापुर प्रखंड के खानपुर गांव के निवासी कृषक श्री रंजीत सिंह अपनी अनूठी और आधुनिक जैविक खेती के कारण बिहार के एक ‘आइकन किसान’ के रूप में उभरे हैं। उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती को भी संभव कर दिखाया है, जिसे पहले इस इलाके के लिए असंभव माना जाता था। उद्यान निदेशालय, बिहार सरकार द्वारा उनकी इस फसल पर 40% का अनुदान भी दिया गया है।
व्यापक रूप से पिताया के नाम से जाना जाने वाला ड्रैगन फ्रूट औषधीय गुणों से भरपूर एक बारहमासी कैक्टस फल है। इसकी उत्पत्ति दक्षिणी मैक्सिको, मध्य अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में मानी जाती है। ड्रैगन फ्रूट अन्य फलों से अलग होता है क्योंकि यह सामान्य पेड़ों पर नहीं बल्कि कैक्टस परिवार के एक विशेष पौधे पर उगता है। भारत में सांस्कृतिक और पारंपरिक जुड़ाव के कारण इसे “कमलम” नाम भी दिया गया है।
Dragon Fruit Farming in Bihar: कम पानी और लंबे समय तक उत्पादन की संभावना
बिहार के किसान अब परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक और नवाचार आधारित खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। उद्यान निदेशालय कृषि विभाग के मुताबिक ड्रैगन फ्रूट का क्षेत्र विस्तार राज्य के 23 जिलों में करने के लिए सरकार प्रयासरत हैं। कम पानी और अपेक्षाकृत कम रखरखाव में होने वाली यह खेती किसानों के लिए आय का नया और आकर्षक विकल्प बनकर उभर रही है।
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रिटायर्ड कृषि पदाधिकारी अरूण कुमार झा के मुताबिक ड्रैगन फ्रूट की खेती (Dragon Fruit Farming in Bihar) में शुरुआती चरण में संरचना और पौधों पर अपेक्षाकृत अधिक निवेश करना पड़ता है, लेकिन एक बार पौधे विकसित हो जाने के बाद लंबे समय तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। यही कारण है कि बिहार के किसान इसे बेहतर आमदनी और कृषि में नवाचार के एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।
ड्रैगन फ्रूट को ’21वीं सदी का चमत्कारिक फल’ भी कहा जाता है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के मुताबिक, भारत में साल 2021 में 15,491 टन आयात हुआ था जो साल 2017 में सिर्फ़ 327 टन था। ऐसे में केंद्र एवं राज्य सरकार ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन पर जोर दे रही है।
बिहार में सरकार भी दे रही Dragon Fruit Farming in Bihar को बढ़ावा
बिहार सरकार द्वारा किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती (Dragon Fruit Farming in Bihar) के लिए प्रोत्साहित करने हेतु ड्रैगन फ्रूट विकास योजना चलाई जा रही है। इस योजना का लाभ किसान न्यूनतम 0.25 एकड़ (0.1 हेक्टेयर) से लेकर अधिकतम 5 एकड़ (2 हेक्टेयर) तक की खेती के लिए ले सकते हैं।
योजना के तहत ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर पहले वर्ष 1,62,000 रुपये और दूसरे वर्ष 1,08,000 रुपये का अनुदान दिया जाता है। हालांकि, देय अनुदान राशि में से पौधरोपण सामग्री की कीमत की कटौती की जाएगी यह योजना किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ ड्रैगन फ्रूट जैसी लाभकारी और आधुनिक फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
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मार्च 2026 को तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किसानों के नवाचारी प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ड्रैगन फ्रूट की खेती स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और बिहार को कृषि क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।
Dragon Fruit Farming in Bihar: किशनगंज के किसानों से जानिए कहानी
बिहार में ड्रैगन फ्रूट की खेती मुख्य तौर पर किशनगंज जिले में सबसे ज्यादा और बड़े पैमाने पर पहचानी जाती है, जहां के किसानों ने इसकी सफल खेती कर एक मिसाल कायम की है। इसके अलावा पूर्णिया, भागलपुर, खगड़िया, पूर्वी चंपारण और कैमूर समेत बिहार के 23 जिलों में उद्यान विभाग की ‘ड्रैगन फ्रूट विकास योजना’ के तहत इसका विस्तार किया जा रहा है।
“साल में 10 लाख रुपया ड्रैगन फ्रूट की खेती से कमाता हूं। आत्मा किशनगंज से मैंने इसकी ट्रेनिंग ली। 2014 से मैं इसकी खेती कर रहा हूं। खेती के 1 साल बाद एक एकड़ से 6 टन फसल निकलता है।”
हंसराज नखत
किशनगंज

मैं इंजीनियरिंग का पढ़ाई कर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहा हूं। अपने फलों को सिलीगुड़ी, पूर्णिया और किशनगंज की स्थानीय मंडियों में बेचता हूं। यदि सही वैज्ञानिक पद्धति से इसकी फार्मिंग की जाए, तो यह खेती बहुत ही मुनाफे वाली साबित होती है।”
कृष्णा पटेल
ठाकुरगंज, किशनगंज

