Khabrilal Live Desk: 2 सितंबर, पटना/चंपारण। Rajkumar Shukla Jayanti-चंपारण के किसान नीलहे अंग्रेज जमींदारों के अत्याचार से बहुत परेशान थे। उन्होंने कई बार विरोध किया, लेकिन अंग्रेजों ने उनके आंदोलन को दबा दिया। किसानों को ऐसे नेता की जरूरत थी, जो उन्हें नील की गुलामी से मुक्ति दिला सके। इसी संघर्ष में पं. राज कुमार शुक्ल आगे आए और उन्होंने महात्मा गांधी को चंपारण बुलाया। गांधी जी का चंपारण आगमन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण घटना बना। गांधी जी को चंपारण लाने का श्रेय राज कुमार शुक्ल को जाता है।
राज कुमार शुक्ल ने गांधी जी को चंपारण तक पहुंचाकर उन्हें सत्य और अहिंसा की प्रयोग भूमि दी। इससे पहले स्वतंत्रता आंदोलन मुख्य रूप से शहरों तक सीमित था। चंपारण ने गांधी जी को यह समझने का अवसर दिया कि भारत की वास्तविक शक्ति गांवों में बसती है और आजादी की लड़ाई को गांवों तक ले जाना जरूरी है। हालांकि, बिहार की आजादी की लड़ाई के इस नायक को वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे हकदार थे।
Rajkumar Shukla Jayanti: 151वीं जयंती पर बिहार सरकार का बड़ा फैसला
23 अगस्त 2026 को चंपारण आंदोलन के प्रणेता, किसानों के मसीहा और स्वतंत्रता संग्राम के अप्रतिम योद्धा पंडित राजकुमार शुक्ल की 151वीं जयंती के अवसर पर बिहार विधान परिषद के एनेक्सी सभागार में समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर बिहार सरकार ने पंडित राजकुमार शुक्ल की स्मृति और उनके योगदान को सम्मान देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि अगले वर्ष से पंडित राजकुमार शुक्ल की जयंती को राजकीय समारोह के रूप में मनाया जाएगा। साथ ही, उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की भी घोषणा की गई।

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पंडित राजकुमार शुक्ल की जीवनी को बिहार सरकार की पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने की घोषणा की। वहीं, कला एवं खनन मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने उनकी स्मृति में संग्रहालय बनाने की घोषणा की। 151वीं जयंती पर बिहार सरकार की घोषणाएं उनके योगदान को सम्मान देने और आने वाली पीढ़ियों को उनके संघर्ष से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
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इस मौके पर माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पं. राजकुमार शुक्ल जी के दृढ़ संकल्प और अथक प्रयासों से महात्मा गांधी जी चंपारण आए तथा ऐतिहासिक चंपारण सत्याग्रह ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में पं. राजकुमार शुक्ल जी का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
विधानसभा में आयोजित इस प्रोग्राम में साहित्यकार डॉक्टर लक्ष्मीकांत सिंह, नवनीत कुमार और राकेश बिहारी शर्मा को पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति सम्मान दिया गया।
क्या बोले चंपारण के लोग
“पं. राज कुमार शुक्ल का जीवन इस बात की मिसाल है कि इतिहास बदलने के लिए हमेशा बड़े पद या बड़ी ताकत की जरूरत नहीं होती। एक साधारण किसान का दृढ़ संकल्प भी पूरे देश के आंदोलन की दिशा बदल सकता है। ऐसे महान व्यक्ति का सम्मान कर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी राजनीतिक कद को बढ़ाया है।”
अभिषेक गुप्ता
लेखक, पश्चिम चंपारण
“जब राजकुमार शुक्ल की मृत्यु हुई थी तो अंग्रेज अधिकारी एम्मन ने कहा था कि चंपारण का वह अकेला मर्द था जो मुझसे 25 वर्ष तक लड़ता रहा। सोचिए उनका व्यक्तित्व कितनी महान थे। आज बिहार सरकार ने जो घोषणा की है, वह काबिले तारीफ है।”
शिवम सिंह
स्थानीय निवासी, चंपारण
“पूरे चंपारण के लिए खुशी की खबर है। यह पूरे चंपारण का सम्मान है। इसके लिए मुख्यमंत्री जी का बहुत-बहुत धन्यवाद।”
अमृत राज
स्थानीय निवासी, चंपारण
