40 अगस्त, पटना। 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद नेपाल में अचानक आई बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। नेपाल में बाढ़ और भारी बारिश का सबसे सीधा और बड़ा असर बिहार के सीमावर्ती जिलों पर पड़ता है।
हालांकि, इस बार बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार की सक्रियता, त्वरित प्रबंधन और समय पर की गई राहत एवं बचाव कार्रवाई सराहनीय रही है। मुख्यमंत्री और प्रशासनिक तंत्र ने जिस तत्परता से जमीनी स्तर पर काम किया, उसकी काफी प्रशंसा हो रही है।
बुधवार यानी 26 अगस्त 2026 को नेपाल में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ के मद्देनजर बिहार सरकार ने समय रहते उत्तर बिहार के कम से कम नौ जिलों में हाई अलर्ट जारी किया।
जल संसाधन विभाग के मुताबिक, बाढ़ के कारण गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से वाल्मीकिनगर गंडक बराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं और बिहार के तटीय जिलों को सतर्क रखा गया। गंडक बराज के 36 फाटकों को खोलने से पानी का प्रवाह सुगम हुआ और बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली।
इसके अलावा, अधिकारियों को गंडक और अन्य नदियों, तटबंधों, निचले इलाकों, पुलों और अन्य संवेदनशील स्थानों के जलस्तर की लगातार निगरानी करने तथा स्थानीय समुदायों को समय पर सतर्क करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन को निकासी योजनाएं, नावें, आश्रय स्थल और सामुदायिक रसोईघर तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों बगहा, वाल्मीकिनगर, बेतिया एवं मोतिहारी में बाढ़ की स्थिति का सर्वेक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संभावित प्रभावों, आवश्यक एहतियाती उपायों, सुरक्षा तथा राहत-बचाव कार्यों को लेकर प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को पूरी तत्परता के साथ आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
वहीं, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बुधवार दोपहर उत्तर बिहार के सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों के साथ आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंस कर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए।
संभावित खतरे को देखते हुए बचाव दलों को तुरंत संवेदनशील और निचले इलाकों में तैनात किया गया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है। साथ ही, गंडक बराज (वाल्मीकिनगर) के फाटकों और जलस्तर पर 24 घंटे पैनी नजर रखी जा रही है तथा विशेष रात्रि गश्त के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा नेपाल में फ्लैश फ्लड में फंसे महाराष्ट्र के करीब 100 तीर्थयात्रियों को भी बिहार सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुरक्षित रेस्क्यू किया। मुख्य सचिव के स्तर से रेलवे बोर्ड से समन्वय कर ट्रेन में दो अतिरिक्त बोगियों की व्यवस्था कराई गई एवं 29 अगस्त को सभी तीर्थयात्रियों को ट्रेन से सुरक्षित एवं सकुशल महाराष्ट्र के लिए रवाना किया गया।
जल संसाधन एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने बेहतर समन्वय के साथ काम किया। इसके अलावा, अन्य विभागों ने भी बेहतर तरीके से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लिए मेडिकल टीमों, जीवन रक्षक दवाओं और राहत शिविरों को पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश जारी किए हैं।
लोगों ने भी की बिहार सरकार की प्रशंसा
प्रसिद्ध यूट्यूबर और पत्रकार शुभंकर मिश्रा ने अपने शो में नेपाल में आई बाढ़ के बीच बिहार सरकार की तैयारियों की सराहना की। उन्होंने कहा, “नेपाल से बाढ़ की खबर मिलते ही बिहार ने अपने 36 गेट खोल दिए, ताकि पानी का दबाव कम हो और जलजमाव की स्थिति न बने। नतीजा आपके सामने है। बिहार पूरी तरह सुरक्षित है।”
वाल्मीकिनगर के रहने वाले अभिषेक गुप्ता ने कहा, “नेपाल की खबर सुनने के बाद सबसे ज्यादा डर हम लोगों को लगा, लेकिन फिर सरकार की मुस्तैदी ने चिंता कम कर दी। एनडीआरएफ की टीम तुरंत आ गई थी। प्रशासन ने हर तरफ से मदद की।”
नागपुर के रहने वाले योगेश गावंडे ने कहा, “नेपाल से बिहार में प्रवेश करने के लिए जिस पुल को हमने पार किया, उस समय उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था, वो पूरी तरह डूब चुका है। जब हम नेपाल में फंसे थे, तब सच में लग रहा था कि हम बचेंगे भी या नहीं। अगर कुछ देर वहां और रुकते तो शायद ही आज जिंदा होते। सरकार ने हमें वहां से सुरक्षित निकाला, इंडिया लाए और फिर हमारे घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके लिए बिहार के CM सम्राट चौधरी का बहुत-बहुत धन्यवाद।”
