Manjhar Kund: करीब 300 फीट नीचे गिरती है जलधारा

Khabrilal Live Desk: 1 सितम्बर, पटना/सासाराम। बिहार के रोहतास जिले में सासाराम के समीप कैमूर पहाड़ियों के बीच स्थित मांझर कुंड (Manjhar Kund) और धुआं कुंड जलप्रपात प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक परंपराओं का अद्भुत संगम हैं। हरी-भरी पहाड़ियों और प्राकृतिक जलधाराओं के बीच स्थित ये झरने विशेष रूप से मानसून और सावन के महीने में बेहद मनमोहक दिखाई देते हैं।

Manjhar Kund: करीब 300 फीट नीचे गिरती है जलधारा

सासाराम से दक्षिण दिशा में कैमूर पहाड़ियों पर स्थित मांझर कुंड तक पहुंचने के लिए पहाड़ी रास्तों से होकर यात्रा करनी पड़ती है। यहां नदी का पानी लगभग 300 फीट नीचे गिरता है, जो पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। इसके समीप स्थित धुआं कुंड भी अपनी प्राकृतिक छटा और गिरते जल की मनोहारी तस्वीर के लिए जाना जाता है।

गुरु तेग बहादुर जी से जुड़ी है Manjhar Kund की धार्मिक मान्यता

मांझर कुंड का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी विशेष है। मान्यता है कि सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर जी अपने प्रवास के दौरान इस क्षेत्र में आए थे। तभी से यहां सिख समुदाय के लोगों द्वारा विशेष पूजा-अर्चना और समागम की परंपरा चली आ रही है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, सिख समुदाय के लोग यहां गुरु ग्रंथ साहिब के साथ पहुंचते रहे हैं और मंझर कुंड में कई दिनों तक ठहरकर धार्मिक अनुष्ठान करते थे। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां के जल में प्राकृतिक खनिज पाए जाते हैं और इसे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

Manjhar Kund में सावन पूर्णिमा के बाद लगता है मेला

मांझर कुंड में रक्षाबंधन या सावन पूर्णिमा के बाद आने वाले पहले रविवार को मेला लगने की परंपरा है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इस वर्ष भी सावन पूर्णिमा के बाद पहले रविवार को मांझर कुंड श्रद्धालुओं और सैलानियों से गुलजार रहा। सिख समुदाय के लोगों ने विशेष पूजा-अर्चना की। श्रद्धालु शनिवार की रात से ही यहां पहुंचने लगे थे। इस दौरान शबद-कीर्तन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने जलधारा में स्नान किया और प्राकृतिक वातावरण के बीच समय बिताया।

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हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु के बाग से पहाड़ मेले की यात्रा निकाली गई। यात्रा में शामिल श्रद्धालु धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मंझर कुंड पहुंचे।

गुरु बाग के प्रबंधक सह अध्यक्ष महंत बजरंगी दास बताते हैं कि सैकड़ों वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए इस वर्ष भी श्रद्धालु मांझर कुंड पहुंचे हैं। यहां पूजा-पाठ और प्रार्थना के माध्यम से देश, राज्य और समाज की प्रगति तथा आपसी भाईचारे की कामना की। यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश भी देता है।

बिहार के पर्यटन मानचित्र पर खास पहचान रखता है Manjhar Kund

इस ऐतिहासिक मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। तभी इस वर्ष मेले से कुछ दिन पहले रोहतास के जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने सासाराम की कैमूर पहाड़ियों में स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मंझर कुंड में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए।

मांझर कुंड और धुआं कुंड बिहार के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में भी शामिल हैं। मानसून के दौरान पहाड़ियों से गिरता पानी, चारों ओर फैली हरियाली और ताजगी भरा वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह इलाका पिकनिक और प्रकृति भ्रमण के लिए भी लोकप्रिय है। परिवारों, युवाओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए कैमूर की पहाड़ियों के बीच बसे ये जुड़वां झरने बिहार की प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा अनुभव कराते हैं।

आस्था, इतिहास और प्रकृति के इस अद्भुत संगम के कारण मंझर कुंड आज भी रोहतास और बिहार के महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।

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