Khabrilal Live Desk: मधुबनी, 24 अगस्त। बिहार की राजनीति में कई ऐसे चेहरे हैं, जिनकी पहचान सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहती। कुछ लोग कारोबार की दुनिया से निकलकर सामाजिक सरोकारों से जुड़ते हैं और फिर सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। राजीव कुमार झा भी अपने राजनीतिक और सामाजिक सफर को इसी व्यापक यात्रा का हिस्सा मानते हैं।

कारोबार, समाजसेवा और राजनीति—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रिय राजीव कुमार झा का कहना है कि सार्वजनिक जीवन का मूल उद्देश्य लोगों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करना होना चाहिए। मधुबनी के विकास को लेकर उनका विजन बुनियादी सुविधाओं से आगे बढ़कर रोजगार, पर्यटन, मिथिला की कला-संस्कृति, स्थानीय उत्पाद और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित है।

संघर्ष से बनी पहचान

राजीव कुमार झा अपनी पहचान को किसी एक उपलब्धि का परिणाम नहीं मानते। उनका कहना है कि सामान्य परिस्थितियों से निकलकर अपनी पहचान बनाना अपने आप में एक लंबा संघर्ष है।

कारोबार के क्षेत्र में भी उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, मुश्किल परिस्थितियों ने उन्हें निर्णय लेने, लोगों को समझने और समस्याओं के बीच रास्ता निकालने की क्षमता दी। उनके लिए कारोबार केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता हासिल करने का माध्यम भी रहा है।

यही व्यावसायिक अनुभव बाद में उनके सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण का आधार बना।

राजनीति में आने की वजह क्या रही?

राजीव कुमार झा के अनुसार, उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल के युवा प्रकोष्ठ से हुई। संगठन में काम करते हुए उन्हें पार्टी की विभिन्न जिम्मेदारियां मिलीं। उनके अनुसार, राष्ट्रीय प्रवक्ता और झारखंड के सह प्रभारी जैसी जिम्मेदारियों ने उन्हें राजनीति और संगठन को करीब से समझने का अवसर दिया।

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उनका कहना है कि राजनीति में आने का उद्देश्य केवल पद हासिल करना नहीं था, बल्कि आम लोगों से जुड़े मुद्दों को व्यापक मंच तक पहुंचाना था।

हालांकि बाद में उन्होंने आरजेडी से अलग होने का फैसला किया। उनके अनुसार, यह निर्णय उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत अनुभवों से जुड़ा था। उनका कहना है कि राजनीति में विचारों की असहमति स्वाभाविक है, लेकिन संवाद, सम्मान और संगठनात्मक मर्यादा महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

मनोज झा प्रकरण का क्या रहा असर?

आरजेडी से अलग होने के कारणों को लेकर राजीव कुमार झा ने अपने अनुभव साझा किए हैं। उनके अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेता मनोज झा के व्यवहार से वे आहत हुए थे और यह घटनाक्रम उनके राजनीतिक फैसले की प्रमुख वजहों में शामिल रहा।

यह राजीव कुमार झा का व्यक्तिगत अनुभव और राजनीतिक दृष्टिकोण है। उनका कहना है कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन असहमति के बावजूद संवाद और व्यक्तिगत सम्मान की गुंजाइश बनी रहनी चाहिए।

आरजेडी से अलग होने के बाद उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नए विकल्पों पर विचार किया और सामाजिक गतिविधियों पर भी अपना ध्यान बढ़ाया।

राजनीति से आगे समाजसेवा

राजीव कुमार झा की सार्वजनिक पहचान में समाजसेवा भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके अनुसार, अलग-अलग इलाकों से लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंचते हैं।

किसी को कानूनी सहायता की जरूरत होती है, तो कोई इलाज के लिए मदद चाहता है। किसी परिवार की आर्थिक समस्या होती है, तो कोई प्रशासनिक स्तर पर अपनी समस्या के समाधान के लिए सहयोग चाहता है।

राजीव झा का मानना है कि जनप्रतिनिधि या सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका केवल चुनाव के समय लोगों के बीच रहने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जनता को जरूरत के समय उपलब्ध रहना ही सार्वजनिक जीवन की वास्तविक परीक्षा है।

आम आदमी की सबसे बड़ी लड़ाई क्या है?

राजीव कुमार झा के मुताबिक, आम आदमी की परेशानी किसी एक समस्या तक सीमित नहीं है। सड़क, जलजमाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सरकारी योजनाओं तक पहुंच—ये सभी मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

उनका कहना है कि जब किसी नागरिक को छोटी-सी समस्या के समाधान के लिए भी अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब व्यवस्था और नागरिक के बीच दूरी दिखाई देती है।

इसीलिए वे ऐसी राजनीति की बात करते हैं जिसमें जनप्रतिनिधि जनता और प्रशासन के बीच प्रभावी सेतु की भूमिका निभाए।

मधुबनी के लिए कैसी राजनीति चाहते हैं राजीव झा?

मधुबनी को लेकर राजीव कुमार झा का विजन केवल सड़क और नाली निर्माण तक सीमित नहीं है। वे जिले को आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से मजबूत बनाने की बात करते हैं।

उनका मानना है कि मधुबनी के पास अपनी अलग पहचान बनाने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। मिथिला की संस्कृति, मिथिला पेंटिंग, धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक विरासत और स्थानीय प्रतिभाएं जिले की बड़ी ताकत बन सकती हैं।

उनके अनुसार, इन क्षेत्रों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो मधुबनी में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं और युवाओं के पलायन को कम किया जा सकता है।

जिला परिषद को लेकर क्या है विजन?

राजीव कुमार झा जिला परिषद को ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखते हैं।

उनके अनुसार, जिला परिषद केवल योजनाओं की स्वीकृति या प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होनी चाहिए। इसे ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं को जिला स्तर तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए सक्रिय संस्था के रूप में काम करना चाहिए।

अगर उन्हें जनता का समर्थन मिलता है और वे जिला परिषद में प्रतिनिधित्व करते हैं, तो उनके मुताबिक उनकी प्राथमिकताओं में सड़क, जलनिकासी, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहेंगे।

पहले 100 दिनों में क्या होगा फोकस?

राजीव कुमार झा के विजन के मुताबिक शुरुआती 100 दिनों में तीन स्तरों पर काम को प्राथमिकता दी जा सकती है।

पहला—समस्या की पहचान:
गांव और पंचायत स्तर पर बुनियादी समस्याओं की विस्तृत सूची तैयार करना।

दूसरा—प्राथमिकता के आधार पर समाधान:
सबसे गंभीर समस्याओं को संबंधित विभागों और प्रशासन के सामने प्रभावी तरीके से रखना।

तीसरा—जवाबदेही:
जिन समस्याओं को उठाया गया है, उनके समाधान की प्रगति पर लगातार नजर रखना।

उनका मानना है कि जनप्रतिनिधि की भूमिका सिर्फ समस्या बताने तक नहीं, बल्कि उसके समाधान तक प्रयास करने की होनी चाहिए।

मिथिला पेंटिंग को रोजगार से जोड़ने का प्लान

मधुबनी की पहचान पूरी दुनिया में मिथिला पेंटिंग से जुड़ी हुई है। राजीव कुमार झा का सवाल है कि क्या इस कला को केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित रखा जाना चाहिए?

उनका मानना है कि मिथिला पेंटिंग को बड़े पैमाने पर रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सकता है।

इसके लिए कलाकारों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने, पर्यटन के साथ कला को जोड़ने तथा स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और मार्केटिंग की व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।

उनके अनुसार, ऐसा मॉडल विकसित होने पर कलाकारों की आय बढ़ाने के साथ युवा पीढ़ी को भी इस पारंपरिक कला से जोड़ा जा सकता है।

युवाओं के पलायन को कैसे रोका जाए?

मधुबनी सहित उत्तर बिहार के सामने रोजगार और पलायन की चुनौती लंबे समय से चर्चा में रही है। राजीव कुमार झा का मानना है कि केवल सरकारी नौकरियों के भरोसे युवाओं के भविष्य को सुरक्षित नहीं किया जा सकता।

वे स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योग, कृषि आधारित व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग जैसे क्षेत्रों में अवसर पैदा करने की जरूरत बताते हैं।

उनके अनुसार, जब युवा को अपने जिले में सम्मानजनक आय का अवसर मिलेगा तो बाहर जाने की मजबूरी कम हो सकती है।

मधुबनी को पर्यटन के नक्शे पर लाने का सपना

राजीव कुमार झा मधुबनी को केवल एक प्रशासनिक जिला नहीं, बल्कि मिथिला की संस्कृति के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होते देखना चाहते हैं।

उनकी कल्पना में ऐसा मधुबनी है जहां धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ा जाए, मिथिला की कला-संस्कृति को पर्यटन से जोड़ा जाए और स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार मिले।

वे मानते हैं कि पर्यटन केवल होटल और सड़क बनाने का विषय नहीं है। इसके लिए परिवहन, स्वच्छता, सुरक्षा, स्थानीय गाइड, डिजिटल प्रचार, होमस्टे, स्थानीय भोजन और हस्तशिल्प को एक साथ विकसित करना होगा।

पांच साल बाद जनता के सामने क्या लेकर जाना चाहते हैं?

राजीव कुमार झा के लिए किसी भी राजनीतिक जिम्मेदारी की सफलता का अंतिम पैमाना जनता का अनुभव है।

उनके विजन के मुताबिक पांच साल बाद वे जनता के सामने पांच प्रमुख उपलब्धियों के साथ जाना चाहेंगे—

  1. ग्रामीण सड़कों और जलनिकासी व्यवस्था में सुधार।
  2. पेयजल और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाना।
  3. शिक्षा और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करना।
  4. मिथिला पेंटिंग, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ना।
  5. मधुबनी के पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना।
  6. “राजीव कुमार झा को ही क्यों चुनें?”

यह सवाल राजीव कुमार झा की राजनीतिक सोच का सबसे संक्षिप्त परिचय भी है।

उनके अनुसार, जनता को ऐसे प्रतिनिधि की जरूरत है जो सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि पूरे कार्यकाल में उनके बीच रहे। जो समस्या को केवल सुने नहीं, बल्कि उसके समाधान के लिए प्रशासन से लेकर सरकार तक लगातार प्रयास करे।

राजीव झा अपनी पहचान को केवल राजनेता के रूप में नहीं देखते। कारोबार से मिला अनुभव, सामाजिक कार्यों के जरिए लोगों के बीच बना संपर्क और राजनीति में काम करने का अनुभव—इन तीनों को वे अपनी ताकत मानते हैं।

उनका संदेश है कि मधुबनी के विकास की राजनीति केवल चुनाव जीतने की राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि लोगों की जिंदगी में वास्तविक बदलाव लाने की राजनीति होनी चाहिए।

राजनीति में आदर्श कौन?

राजनीति में अपने आदर्श को लेकर राजीव कुमार झा का जोर ऐसे नेताओं पर है जिन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम माना। उनके लिए राजनीतिक जीवन में विचार, संगठन, संघर्ष और जनता के प्रति जवाबदेही महत्वपूर्ण हैं। वे मानते हैं कि किसी भी नेता का मूल्यांकन केवल उसके भाषणों से नहीं, बल्कि उसके काम और लोगों के साथ उसके व्यवहार से होना चाहिए।

मधुबनी की कौन-सी समस्या सबसे ज्यादा परेशान करती है?

मधुबनी की बुनियादी समस्याएं राजीव झा के लिए सबसे बड़ा सवाल हैं। खासकर जलजमाव, सड़क, रोजगार और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं को वे आम लोगों के दैनिक जीवन से सीधे जुड़ा मुद्दा मानते हैं।

उनका कहना है कि जब विकास की मूलभूत सुविधाएं लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंचतीं, तब बड़े-बड़े विकास के दावे अधूरे लगते हैं।

मधुबनी के लिए सबसे बड़ा सपना

राजीव कुमार झा का सबसे बड़ा सपना ऐसा मधुबनी बनाना है जिसकी पहचान केवल पिछड़ेपन या पलायन से नहीं, बल्कि मिथिला की संस्कृति, कला, पर्यटन, रोजगार और आर्थिक विकास से हो।

वे चाहते हैं कि मधुबनी के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाने की मजबूरी कम हो और बाहर के लोग रोजगार, पर्यटन और निवेश के लिए मधुबनी की ओर आएं।

यही सोच उनके राजनीतिक और सामाजिक विजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दिखाई देती है।

आगे की राह पर टिकी निगाहें

राजीव कुमार झा की राजनीतिक यात्रा कारोबार, सामाजिक गतिविधियों और राजनीति के अनुभवों के बीच आगे बढ़ी है। 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने मधुबनी सीट से राइट टू रिकॉल पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और 1,507 वोट हासिल किए।

अब उनकी राजनीतिक भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह आने वाला समय तय करेगा। हालांकि उनके सामने रखा गया विजन मधुबनी के विकास की चर्चा को केवल चुनावी मुद्दों तक सीमित नहीं रखता।

रोजगार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, मिथिला पेंटिंग और स्थानीय अर्थव्यवस्था—इन मुद्दों के जरिए मधुबनी की नई तस्वीर बनाने का उनका दावा आने वाले समय में स्थानीय राजनीति की चर्चा का हिस्सा बन सकता है।

उनकी राजनीतिक सोच का सार यही है कि मधुबनी को ऐसी विकास राजनीति की जरूरत है जिसमें संस्कृति उसकी पहचान हो, रोजगार उसकी ताकत हो और जनता उसकी प्राथमिकता।

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