Khabrilal Live Desk: 24 अगस्त, पटना। औरंगाबाद जिले के देव प्रखंड की रहने वाली धर्मशिला देवी आज अपने कारोबार के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। वर्ष 2023 में वह चमेली जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने 50,000 रुपए का ऋण लेकर देव बाजार में सिलाई मशीन बिक्री का व्यवसाय शुरू किया।
शुरुआत में उन्हें कारोबार चलाने में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत उन्हें 10,000 रुपए की सहायता राशि मिली। इस राशि से अतिरिक्त मशीनें और जरूरी उपकरण खरीदे कर उन्होंने अपने कारोबार को और व्यवस्थित किया। आज वह अपने व्यवसाय के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
लाखों महिलाओं को मिल रहा आत्मनिर्भरता का रास्ता
धर्मशिला देवी की तरह बिहार की लाखों महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। वर्ष 2006 में शुरू हुई जीविका परियोजना से जुड़ी महिलाएं विभिन्न तरह के उद्यमों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और समाज में अपनी मजबूत भूमिका निभा रही हैं।
किसी भी राज्य और समाज में महिलाएं उसकी मजबूत रीढ़ होती हैं। वे परिवार को संभालने, बच्चों को अच्छे संस्कार देने के साथ-साथ समाज और देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इसलिए महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं और अभियानों के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी कड़ी में बिहार में जीविका के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। बिहार सरकार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना भी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं का जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ा होना अनिवार्य है।
क्या है मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना?
आसान भाषा में बताएं तो मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत हर परिवार की एक महिला को रोजगार शुरू करने के लिए सीधे उनके बैंक खाते में 10,000 रुपए की पहली किस्त दी जाएगी। छह महीने बाद प्रगति के मूल्यांकन के आधार पर उन्हें ₹ 2 लाख रुपया तक की अतिरिक्त सहायता मिल सकती है। साथ ही, हाट-बाजार के माध्यम से उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री का अवसर भी मिलेगा।
हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत घोषणा की है कि जीविका से जुड़ी 1.81 करोड़ से अधिक महिलाओं को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। सरकार डीबीटी के माध्यम से पात्र महिलाओं के बैंक खातों में राशि भेज रही है और नई जुड़ने वाली महिलाओं को भी जल्द राशि ट्रांसफर की जाएगी।
Also Read: धान की बेहतर पैदावार से गेहूं की शानदार फसल तक, सरकार के इस अभियान से क्यों खुश हैं किसान?
यह पहल महिला उद्यमिता को गांव से लेकर शहर तक एक नया मंच देगी। महिला सशक्तिकरण के जरिए बिहार को विकसित बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। बिहार सरकार महिला सम्मान को सशक्तिकरण का आधार बनाकर बेटियों की शिक्षा, महिलाओं के स्वावलंबन और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
जानिए महिलाओं की कहानी
“मैं साल 2016 से जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हूं। साल 2019 में समूह से 20 हजार रुपये का ऋण लेकर और अपनी बचत से मुर्गीपालन का रोजगार शुरू किया। धीरे-धीरे रोजगार बढ़ाया और आज हर महीने करीब 1000 से 1500 मुर्गियां तैयार कर बेचती हूं, जिससे 20-25 हजार रुपये की मासिक आमदनी हो जाती है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से मिले 10 हजार रुपये को भी मैंने मुर्गीपालन में लगाया है। अब मेरा सपना है कि इस रोजगार को और बड़े स्तर पर बढ़ाकर अपनी आमदनी बढ़ाऊं और परिवार को बेहतर जीवन दे सकूं।”
~ केशोमनी देवी, अरवल

“मैं पहले बहुत गरीबी में अपना परिवार चला रही थी और खेतों में मजदूरी करती थी। जीविका से जुड़ने के बाद सतत जीविकोपार्जन योजना का लाभ मिला और मैंने किराना दुकान शुरू की। इसके बाद शृंगार और कपड़े का व्यवसाय, पशुपालन और पट्टे पर खेती भी शुरू की। सरकार की महिला रोजगार को बढ़ावा देने वाली योजनाओं और जीविका के सहयोग से आज मेरी आमदनी बढ़ी है। अब सभी व्यवसायों से मुझे हर महीने करीब 25 से 30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। गरीबी दूर हुई है और जीवन में खुशहाली आई है।”
~ रिंकू देवी, लखीसराय

“जीविका से जुड़ने के बाद मैंने अपने रोजगार को आगे बढ़ाने के लिए समूह से ऋण लेकर काम शुरू किया। आज मैं शृंगार सामग्री, सिलाई और मनी ट्रांसफर का काम कर रही हूं, साथ ही कृषि उद्यमी सेवा केंद्र के माध्यम से खाद और बीज भी बेचती हूं। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से मुझे 10 हजार रुपये मिले हैं, जिसे मैंने अपने रोजगार को और आगे बढ़ाने में लगाया है। आज मेरे विभिन्न रोजगार से अच्छी आमदनी हो रही है और मैंने अपने परिवार के लिए पक्का मकान भी बनवाया है। अब मैं अपने रोजगार को और आगे बढ़ाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना चाहती हूं।”
~ बेबी कुमारी, अरवल

