Khabrilal Live Desk: पटना, 21 अगस्त। पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने आज पटना में बिहार के महामहिम राज्यपाल से मुलाकात कर सहायक प्राध्यापक नियुक्ति के लिए प्रस्तावित/प्रवृत्त Statute 2026 में कथित विसंगतियों की स्वतंत्र समीक्षा और आवश्यक संशोधन की मांग की। इसके अलावा शिक्षक और छात्रों के दर्जन भर मुद्दों पर सांसद ने राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि नियमावली से बिहार के हजारों योग्य एवं उच्च शिक्षित अभ्यर्थियों में चिंता और आक्रोश है। यह मामला केवल किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था, युवाओं के रोजगार के अवसर और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है।
पप्पू यादव ने कहा कि सहायक प्राध्यापक पद के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु सीमा का व्यावहारिक आधार स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैट्रिक, इंटर, स्नातक और स्नातकोत्तर के बाद NET/JRF तथा Ph.D. जैसी उच्च योग्यताएं हासिल करने में वर्षों लगते हैं। ऐसे में आयु सीमा तय करते समय वास्तविक शैक्षणिक प्रक्रिया, शोध की अवधि और भर्ती में होने वाली देरी को ध्यान में रखा जाना चाहिए। सांसद ने कहा कि बिहार में लंबे समय तक सहायक प्राध्यापकों की नियमित नियुक्तियां नहीं हुईं। भर्ती प्रक्रिया में वर्षों की देरी के कारण अनेक योग्य अभ्यर्थी निर्धारित आयु सीमा पार कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासनिक देरी का दंड उन युवाओं को क्यों मिले, जिन्होंने वर्षों तक NET, JRF, Ph.D. और शोध कार्य में अपना समय लगाया है। उन्होंने सरकार से भर्ती प्रक्रिया में हुए विलंब और आयु सीमा के बीच समायोजन को स्पष्ट करने की मांग की।
सांसद ने कहा कि बिहार के युवाओं को अपने ही राज्य में समान और न्यायपूर्ण अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सहायक प्राध्यापक नियुक्तियों का राज्यवार और श्रेणीवार आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पूर्व की नियुक्तियों में बिहार के अभ्यर्थियों की स्थिति क्या रही है। उन्होंने कहा कि यह मांग किसी दूसरे राज्य के अभ्यर्थियों की योग्यता के खिलाफ नहीं है, बल्कि बिहार के युवाओं के अवसरों की सुरक्षा से जुड़ी है। ज्ञापन में प्रभावी और संवैधानिक रूप से सुसंगत डोमिसाइल नीति पर भी व्यापक विमर्श की मांग की गई। सांसद ने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा और शोध के लिए पर्याप्त आधारभूत संरचना विकसित करना भी जरूरी है, ताकि राज्य के विद्यार्थियों को उच्च योग्यता हासिल करने के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े।
Also Read: MP Pappu Yadav joined the protest by teacher aspirants and targeted the government
पप्पू यादव ने राज्यपाल को बिहार के पीएच.डी. धारकों एवं शोधार्थियों के आंदोलन की स्थिति से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि All Ph.D. Holders & Research Scholars Association of Bihar की ओर से 4 अगस्त से गर्दनीबाग, पटना में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन-सह-महाधरना चल रहा है। ज्ञापन के अनुसार संगठन के प्रदेश संयोजक कुमुद पटेल लगातार अनशन पर हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक बताई गई है। सांसद ने कहा कि आंदोलनकारी शोधार्थियों की मांगों को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री और अपर मुख्य सचिव के साथ वार्ता के बावजूद अब तक ठोस समाधान नहीं निकल सका है। उन्होंने राज्यपाल से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
सांसद ने राज्यपाल से Statute 2026 की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष समीक्षा के लिए समिति गठित करने, प्रभावित अभ्यर्थियों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों से संवाद कराने तथा आयु सीमा, API और डोमिसाइल संबंधी प्रावधानों की समीक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने समीक्षा पूरी होने तक संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया को स्थगित रखने की मांग भी रखी। इसके साथ ही उन्होंने UGC Regulation 2018 की Table 3A लागू करने, अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करने, विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति, अतिथि सहायक प्राध्यापकों को सेवा-संरक्षण देने और विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक-प्रशासनिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
पप्पू यादव ने कहा कि शोधार्थियों की मांग केवल नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि बिहार की उच्च शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने अनशनकारियों की जीवन रक्षा के लिए तत्काल चिकित्सकीय निगरानी और आंदोलनकारियों से प्रत्यक्ष संवाद की मांग करते हुए कहा कि किसी भी अप्रिय स्थिति से पहले सरकार को ठोस और समयबद्ध निर्णय लेना चाहिए।
