Khabrilal Live Desk: 16 अक्टूबर, पटना, सुपौल। बिहार के सुपौल जिले की शिक्षिका श्रुति मौसम इन दिनों अपने अनोखे अंदाज में बच्चों को पढ़ाने के लिए चर्चा में हैं। उनके पढ़ाने का तरीका सामान्य कक्षाओं से अलग है। वह हारमोनियम की धुन पर भजन और श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों को गीतों में पिरोकर बच्चों को सिखाती हैं। उनका यह अंदाज बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के साथ उनमें रुचि भी पैदा करता है। उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और लोग उनके इस प्रयास की खूब सराहना कर रहे हैं।
बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए संगीत शिक्षा और वाद्य यंत्रों की पहल शुरू की गई है। इसका उद्देश्य छात्रों में अनुशासन, धैर्य, टीम वर्क और समग्र व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ पारंपरिक लोक गीतों व संस्कृति से जोड़ना है।
श्रुति मौसम सुपौल जिले के वीरपुर स्थित उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, बसंतपुर में संगीत शिक्षिका हैं। जुलाई 2026 में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में आया था। इस वीडियो में वह कक्षा में बच्चों को संगीत सिखाते हुए श्री रामचरितमानस की पत्तियां और भजन गाती नजर आईं। उनके इस अनोखे अंदाज ने लोगों का ध्यान खींचा।

श्रुति का मानना है कि एक शिक्षिका के रूप में बच्चों को ज्ञान और संस्कार देना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उनके मुताबिक, कई बार बच्चे स्कूल नहीं आना चाहते हैं। ऐसे में खेलकूद और गीत-संगीत के माध्यम से उन्हें पढ़ाया जाए, तो उनकी पढ़ाई में रुचि बढ़ती है। इसी सोच के साथ वह संगीत को बच्चों की शिक्षा का हिस्सा बनाकर उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करती हैं।
पिता से मिली संगीत की प्रारंभिक शिक्षा
सुपौल जिले के वीरपुर की रहने वाली श्रुति मौसम का संगीत से पुराना जुड़ाव है। उन्हें संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता उमेश चंद्र झा से मिली, जो स्वयं भी संगीत शिक्षक हैं। बचपन से संगीत के प्रति लगाव ने उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा की पहचान स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंची।
संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान और उपलब्धियों के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2007 में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के साथ-साथ कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा जिला प्रशासन, सहरसा की ओर से भी उन्हें सम्मान मिला। वर्ष 2008 में सामाजिक संस्था युरेकाई ने उन्हें सम्मानित किया।

वर्ष 2010 और 2011 में वीरपुर में आयोजित राष्ट्रीय पर्व समारोहों में उन्हें सम्मान मिला। इसके अलावा, वर्ष 2010, 2013 और 2014 में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान अनुमंडल प्रशासन ने उन्हें सम्मानित किया। सुपौल में आयोजित बाल कवि सम्मेलन में भी उन्हें सम्मानित किया गया।
पढ़ाई में भी हासिल की उपलब्धियां
श्रुति मौसम ने शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। बीए की परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए उन्हें दिल्ली में श्री तेज सिंह मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित किया गया। वहीं, बीए पार्ट-टू में अधिकतम अंक प्राप्त करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज (आईपी कॉलेज) ने उन्हें वीरेंद्र सिंह मेमोरियल पुरस्कार से नवाजा।
उन्हें तत्कालीन कला एवं संस्कृति मंत्री आलोक रंजन के हाथों मिथिला गौरव सम्मान भी मिल चुका है। इसके अलावा, वह नई दिल्ली की साहित्य कला परिषद से सम्मानित हो चुकी हैं और आकाशवाणी, ऑल इंडिया रेडियो, नई दिल्ली की ग्रेडेड आर्टिस्ट भी हैं।
कई प्रमुख हस्तियों के सामने दे चुकी हैं सांगीतिक प्रस्तुति
श्रुति मौसम को कई प्रमुख हस्तियों के सामने अपनी सांगीतिक प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिल चुका है। उन्होंने भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू के समक्ष सांगीतिक प्रस्तुति दी है। इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह, योगगुरु बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर और केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के समक्ष भी अपनी कला प्रस्तुत कर चुकी हैं।
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संगीत के क्षेत्र में उपलब्धियों के साथ-साथ श्रुति मौसम अब एक शिक्षिका के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना रही हैं। वह गीत-संगीत के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने और उन्हें ज्ञान के साथ संस्कार देने का प्रयास कर रही हैं। उनका यह तरीका बताता है कि शिक्षा को रुचिकर बनाने के लिए संगीत जैसे माध्यमों का भी उपयोग किया जा सकता है। यही वजह है कि उनके पढ़ाने के अनोखे अंदाज की सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है।
