Khabrilal Live Desk: 24 अगस्त, पटना। Bihar Pink Bus Service | “शहर की भीड़भाड़ के बीच महिलाओं के लिए अलग बस सेवा शुरू करना सरकार का एक संवेदनशील और सराहनीय फैसला है। यह पहल महिलाओं की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।” बेली रोड से स्टेशन तक सफर कर रही पूजा बताती है।

बिहार सरकार द्वारा महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य के प्रमुख शहरों में पिंक बस सेवा संचालित की जा रही है। इन बसों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस ट्रैकर और पैनिक बटन लगाए गए हैं। बसों में टिकट और परिचालन के लिए मुख्य रूप से महिला कंडक्टर तैनात की जाती हैं। ये बसें एसी युक्त, लो-फ्लोर और बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक बसें हैं। इनमें मोबाइल चार्जिंग पॉइंट और आरामदायक सीटों की सुविधा भी उपलब्ध है।

हाल ही में रक्षाबंधन के अवसर पर प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत पटना और आसपास के क्षेत्रों के लिए आधुनिक एसी इलेक्ट्रिक पिंक बसों का भी संचालन (Bihar Pink Bus Service) शुरू किया गया है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत मिली इन पांच इलेक्ट्रिक बसों का संचालन पटना और आसपास के इलाकों में किया जा रहा है। सभी बसें लो-फ्लोर, बैटरी चालित और एसी युक्त हैं। बीएसआरटीसी के अनुसार, दो बसें पटना-पालीगंज, दो पटना-बेली रोड कमरूट और एक बस पटना-बिहटा मार्ग पर चल रही है। इससे महिलाओं को आरामदायक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन की सुविधा मिलेगी।

महिलाओं के लिए मुफ्त या सुरक्षित बस यात्रा की सुविधा देना राज्य सरकारों की एक महत्वपूर्ण सामाजिक कल्याण पहल है। इसका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक सफर के साथ आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। महिलाओं का कहना है कि इस पहल से उनकी यात्रा अधिक सुरक्षित, आसान और सुविधाजनक हुई है। महिला सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देने वाली सरकार की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है।

Bihar Pink Bus Service: 6 बेटियों ने थामी स्टीयरिंग, बदली पहचान

महिलाओं के लिए सुरक्षित और बेहतर परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मई 2025 में बिहार में पिंक बस सेवा (Bihar Pink Bus Service) शुरू की गई थी। सरकार ने तय किया था कि इन बसों में ड्राइवर से लेकर कंडक्टर तक पूरा स्टाफ महिलाएं ही होंगी। शुरुआत में महिला कंडक्टर तो मिल गईं, लेकिन महिला बस ड्राइवरों की कमी एक चुनौती बनी रही। अब परिवहन विभाग इस कमी को दूर करने के लिए महिलाओं को बस चलाने की ट्रेनिंग दे रहा है।

इसी पहल के तहत रागिनी कुमारी, गायत्री कुमारी, आरती कुमारी, सरस्वती कुमारी, बेबी कुमारी और अनीता कुमारी को 2025 में औरंगाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रेफिक रिसर्च (IDTR) में प्रशिक्षण दिया गया। ये छह महिलाएं अब बस ड्राइविंग में दक्ष हो चुकी हैं। पटना स्थित BSRTC कार्यालय की दीवारों पर इनकी तस्वीरें भी लगाई गई हैं। एक पोस्टर पर लिखा है— “महिलाओं की शक्ति, देश की शक्ति।”

Also Read: इन महिलाओं की सफलता की कहानी से जानिए, बिहार में कैसे लिखी जा रही है महिला समृद्धि की नई इबादत

बस की स्टेयरिंग संभालते हुए इन महिलाओं का आत्मविश्वास देखते ही बनता है। एक्सेलेरेटर दबाकर वे आसानी से तीखे मोड़ पार करती हैं और साबित करती हैं कि महिलाएं किसी भी जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकती हैं। इस पहल का उद्देश्य केवल महिलाओं को रोजगार देना नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है। पिंक बस सेवा उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो पारंपरिक रूप से पुरुषों से जुड़े माने जाने वाले पेशों में अपना करियर बनाना चाहती हैं।

बस की स्टेयरिंग संभालते हुए इन महिलाओं का आत्मविश्वास देखते ही बनता है।

Bihar Pink Bus Service: महिला यात्रियों ने बताया अपना अनुभव

“सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं को अक्सर सुरक्षा और सुविधा से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सुविधा को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार की ओर से शुरू की गई पिंक बस सेवा (Bihar Pink Bus Service) एक सराहनीय पहल है। इससे महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का बेहतर विकल्प मिलेगा।”

“एक भाई का सबसे बड़ा फर्ज अपनी बहन की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना होता है। बिहार की एक महिला के तौर पर मैं मानती हूं कि अगर सम्राट भैया की सरकार महिलाओं की यात्रा को सुरक्षित और बेफिक्र बनाने की दिशा में काम कर रही है, तो इससे बेहतर पहल और क्या हो सकती है। महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन की यह व्यवस्था हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली और सराहनीय पहल है।”

Bihar Pink Bus Service

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *