Khabrilal Desk: पटना, 09 जुलाई। विकास केवल सड़क, पुल और भवनों के निर्माण से नहीं मापा जाता, बल्कि इस बात से भी तय होता है कि सरकार समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है। बुजुर्गों, विधवा महिलाओं और दिव्यांगजनों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना किसी भी कल्याणकारी राज्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार और पेंशन राशि में वृद्धि के माध्यम से इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।
राज्य सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन को केवल वित्तीय सहायता के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे सामाजिक सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रयास किया है। जून 2025 से पेंशन राशि को बढ़ाकर ₹1100 प्रतिमाह किए जाने के निर्णय ने लाखों लाभार्थियों को अतिरिक्त आर्थिक राहत प्रदान की है। लगातार बढ़ती महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों के बीच यह बढ़ी हुई सहायता उनके दैनिक जीवन को अपेक्षाकृत आसान बनाने में सहायक साबित हो रही है।
छह योजनाओं के माध्यम से व्यापक सुरक्षा कवच
बिहार में सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था कई वर्गों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार की छह प्रमुख पेंशन योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इनमें वृद्धजनों, विधवा महिलाओं और दिव्यांग नागरिकों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सहायता से वंचित न रहे।
राज्य सरकार की विशेष पहल मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना को माना जाता है। जहां केंद्र सरकार की वृद्धावस्था पेंशन योजना मुख्य रूप से बीपीएल परिवारों तक सीमित है, वहीं बिहार ने 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन सभी पात्र बुजुर्गों को योजना से जोड़ने का प्रयास किया है जो किसी अन्य सरकारी पेंशन का लाभ नहीं ले रहे हैं। इससे हजारों ऐसे वरिष्ठ नागरिकों को भी सहायता मिली है जो पहले सरकारी सुरक्षा तंत्र से बाहर थे।
बढ़ी हुई पेंशन बनी आर्थिक सहारा
₹1100 प्रतिमाह की पेंशन कई परिवारों के लिए छोटी राशि नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह धनराशि दवाइयों की खरीद, राशन, बिजली बिल, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है।
सामाजिक क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि नियमित आर्थिक सहायता मिलने से बुजुर्गों की परिवार पर निर्भरता कुछ हद तक कम होती है। वहीं विधवा महिलाओं और दिव्यांग नागरिकों को भी अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक निश्चित आय का स्रोत उपलब्ध होता है।
महिलाओं के सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में पहल
पति की मृत्यु के बाद आर्थिक कठिनाइयों का सामना करने वाली महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं। लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के माध्यम से हजारों महिलाओं को नियमित सहायता मिल रही है।
इस सहायता का महत्व केवल आर्थिक नहीं है। यह महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने, उन्हें परिवार और समाज में सम्मानजनक स्थिति देने तथा दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी मददगार साबित हो रही है।
दिव्यांगजनों के लिए समावेशी सोच
दिव्यांग नागरिकों के लिए भी बिहार सरकार ने व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है। राष्ट्रीय स्तर की योजना के अतिरिक्त राज्य स्तर पर संचालित दिव्यांगता पेंशन योजना के माध्यम से अधिक पात्र लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
इससे ऐसे दिव्यांगजन भी सरकारी सहायता के दायरे में आए हैं जिन्हें पहले किसी कारणवश लाभ नहीं मिल पाता था। यह पहल सामाजिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
तकनीक से पारदर्शिता और सुगमता
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संचालन में डिजिटल व्यवस्था को भी प्रमुखता दी गई है। आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन करने, रिकॉर्ड प्रबंधन, लाभार्थियों की निगरानी और भुगतान व्यवस्था में तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता बढ़ी है।
RTPS के माध्यम से आवेदन, SSPMIS पोर्टल, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, नियमित समीक्षा तथा डिजिटल डाटा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं ने योजनाओं के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाया है। इससे पात्र लाभार्थियों तक समय पर सहायता पहुंचाने में भी सुविधा मिली है।
शिकायतों के समाधान की प्रभावी व्यवस्था
सरकार ने केवल योजनाएं लागू करने तक ही अपने प्रयास सीमित नहीं रखे हैं, बल्कि लाभार्थियों की शिकायतों के समाधान के लिए भी बहुस्तरीय व्यवस्था विकसित की है।
प्रखंड स्तर से लेकर जिला सामाजिक सुरक्षा कार्यालय, समाज कल्याण विभाग और बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध होने से लोगों को अपने अधिकारों के संरक्षण का भरोसा मिलता है।
गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मिल रही मजबूती
सामाजिक सुरक्षा पेंशन का प्रभाव केवल लाभार्थियों तक सीमित नहीं रहता। हर महीने मिलने वाली राशि स्थानीय बाजारों में खर्च होती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है।
दवा दुकानों, किराना व्यवसायियों, कपड़ा दुकानों और अन्य छोटे कारोबारियों तक इस धन का प्रवाह पहुंचता है। इस प्रकार सामाजिक सुरक्षा योजनाएं स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी अप्रत्यक्ष रूप से मजबूत करती हैं।
सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ता कदम
इन योजनाओं का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन्होंने आर्थिक सहायता को सामाजिक सम्मान से जोड़ दिया है। नियमित पेंशन मिलने से बुजुर्गों, विधवा महिलाओं और दिव्यांग नागरिकों में आत्मविश्वास बढ़ा है। अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर रहने की स्थिति में कमी आई है और उनमें आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हुई है।
कल्याणकारी शासन की एक महत्वपूर्ण पहचान
बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं केवल सरकारी सहायता कार्यक्रम नहीं रह गई हैं, बल्कि कल्याणकारी शासन की एक महत्वपूर्ण पहचान बनकर उभरी हैं। पेंशन राशि में वृद्धि, योजनाओं का व्यापक दायरा, डिजिटल व्यवस्था, पारदर्शी निगरानी और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र ने इन्हें अधिक सशक्त बनाया है।
आगे यदि पात्र लाभार्थियों की शत-प्रतिशत पहचान, समय पर भुगतान और तकनीकी सेवाओं का विस्तार लगातार जारी रहता है, तो सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में बिहार एक मजबूत और प्रभावी मॉडल के रूप में अपनी पहचान को और सुदृढ़ कर सकता है।
