Khabrilal Live Desk: 26 अगस्त, पटना।भागलपुर की रहने वाली और किशनगंज में शिक्षिका के रूप में कार्यरत रोजी कुमारी बताती हैं कि नौकरी लगने के बाद जब उनका ट्रांसफर गांव में हुआ, तो शुरुआत में वह वहां के माहौल और सड़कों को लेकर चिंतित थीं। लेकिन गांव पहुंचने के बाद उनकी धारणा पूरी तरह बदल गई।

रोजी बताती हैं कि, “आज गांव और शहर की सड़कों व सुविधाओं में कोई खास फर्क नजर नहीं आता। यह बदलाव महिलाओं के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि बेहतर सड़क और सुविधाएं उन्हें आगे बढ़ने के अधिक अवसर देती हैं।”

रोजी कुमारी की तरह बिहार की लाखों ग्रामीण महिलाओं के लिए बेहतर सड़कें नई उम्मीद की किरण बनी हैं। पक्की ग्रामीण सड़कों के निर्माण से महिलाओं की आवाजाही आसान हुई है और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा आजीविका के अवसरों तक उनकी पहुंच बढ़ी है।

बेहतर सड़क संपर्क से महिलाओं को घर से बाहर निकलने में पहले की तुलना में कम पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। इससे उनकी स्थानीय गतिशीलता बढ़ी है। बालिकाओं का स्कूल पहुंचना आसान हुआ है, वहीं गर्भवती महिलाओं और अन्य ग्रामीणों के लिए अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों तक समय पर पहुंचना संभव हुआ है।

बाजार, बैंक और आजीविका के अन्य संसाधनों तक आसान पहुंच ने ग्रामीण महिलाओं के अवसरों का दायरा बढ़ाया है और उनकी सामाजिक स्वायत्तता को मजबूत किया है।

इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान की अर्थशास्त्र की सहायक प्रोफेसर भारती नंदवानी के अनुसार ग्रामीण सड़कों के बेहतर नेटवर्क ने महिलाओं के आवागमन की बाधाएं कम की है। इससे लड़कियों की शिक्षा में भागीदारी बढ़ी है, महिलाओं की स्वायत्तता मजबूत हुई है और प्रगतिशील सामाजिक बदलाव को बढ़ावा मिला है। हालांकि, महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और श्रमबल में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अभी और प्रयास की जरूरत है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि देश के किसी भी शहर या राज्य में चले जाइए, बिहार जैसी बेहतर ग्रामीण सड़कें आपको कहीं नहीं मिलेंगी।

गांव की महिलाओं से जानिए उनकी कहानी

“पहले घर से भी नहीं निकलते थे। अब गांव से बाहर हमारी अपनी छोटी-सी दुकान है। बेटा गांव में रहता है और हम पति के साथ मिलकर दुकान चलाते हैं। गाड़ी से सिर्फ आधे घंटे में पहुंच जाते हैं। ग्रामीण सड़क बेहतर बनने से बहुत फायदा हुआ है।”
राधा देवी

“पहले नाव के माध्यम से शहर जाना पड़ता था। पति के बिना जाना मुश्किल था। जब से पुल बना है, तब से घर से अकेले भी निकल जाते हैं। इससे बेहतर महिला सशक्तिकरण का उदाहरण और क्या हो सकता है। बिहार सरकार अच्छा काम कर रही है।”
रिंकू देवी, किशनगंज

“छात्राओं और शिक्षिकाओं को स्कूल जाना हो या महिलाओं को बाजार, अब सब कुछ बहुत आसान हो गया है। पहले जैसी स्थिति नहीं रही। सड़कें बदलने के साथ नए बिहार में महिलाओं की स्थिति भी बदल रही है।”
साक्षी राज, नदमा गांव

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *