Khabrilal Live Desk: नई दिल्ली, 21 अगस्त। विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक फल्गु (निरंजना) नदी को उसके उद्गम स्थल झारखंड के चतरा/बेलगड्डा से लेकर बिहार के गया जी होते हुए गंगा संगम तक अविरल और बारहमासी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी के प्रयासों के बाद 20 अगस्त को नई दिल्ली में नदी पुनर्जीवन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक हुई।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की। इसमें केंद्रीय MSME मंत्री जीतन राम मांझी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव सहित केंद्र और बिहार-झारखंड सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
NHAI संभाल सकता है नदी पुनर्जीवन के पहले चरण का काम
बैठक में नितिन गडकरी ने कहा कि यदि बिहार और झारखंड सरकारें आवश्यक अनुमति और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) उपलब्ध कराती हैं, तो NHAI नदी पुनर्जीवन के पहले चरण का काम अपने हाथ में ले सकता है।
योजना के तहत नदी के उन हिस्सों में डीसिल्टिंग और मिट्टी की खुदाई की जाएगी, जहां तलछट जमा होने के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया है और कई स्थानों पर नदी का स्वरूप लगभग समाप्त हो चुका है। बैठक में यह भी बताया गया कि खुदाई से निकलने वाली मिट्टी का उपयोग राजमार्ग निर्माण में किया जा सकता है। इससे नदी के पुराने प्राकृतिक बहाव मार्ग को फिर से खोलने में मदद मिलने की उम्मीद है।
करीब 300 किलोमीटर के नदी कॉरिडोर के विकास पर जोर
जीतन राम मांझी ने लगभग 300 किलोमीटर लंबे फल्गु नदी कॉरिडोर के समग्र विकास पर जोर दिया। उन्होंने उद्गम स्थल से गंगा संगम तक नदी के आसपास एक भव्य परिक्रमा पथ विकसित करने की योजना पर भी चर्चा की।
Also Read: जीविका के जरिए वैशाली की लक्ष्मी दीदी ने पारंपरिक कला को बनाया सफल कारोबार
बैठक में फल्गु नदी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को भी रेखांकित किया गया। गया जी में पिंडदान और तर्पण के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि बोधगया भगवान बुद्ध से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।
भूजल रिचार्ज से लेकर चेक-डैम तक बनेगी कार्ययोजना
फल्गु नदी में वर्षभर स्वच्छ जल का प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए उसके कैचमेंट क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से भूजल पुनर्भरण, चेक-डैम निर्माण, पारंपरिक आहर-पाइन के जीर्णोद्धार और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की योजना पर भी काम किया जाएगा।
इसका उद्देश्य नदी के जलस्तर और प्रवाह को बेहतर करना तथा मानसून के बाद भी नदी में पर्याप्त जल उपलब्ध कराना है।
पर्यावरणीय मंजूरियों में तेजी का भरोसा
बैठक में जल शक्ति मंत्रालय की सचिव अर्चना वर्मा, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) और NHAI के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, जल संसाधन विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। झारखंड सरकार और NHAI के क्षेत्रीय अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।

IIT रुड़की कंसोर्टियम की ओर से प्रो. ए. एस. मौर्य ने फल्गु नदी के पुनर्जीवन को लेकर वैज्ञानिक प्रस्तुति दी। जल, नदी और भूजल विशेषज्ञों ने भी परियोजना के तकनीकी पहलुओं पर सुझाव दिए।
बैठक में पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की ओर से आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियों में तेजी का भरोसा दिया गया, जबकि जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने परियोजना के तकनीकी क्रियान्वयन पर सहमति जताई।
धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी परियोजना
फल्गु नदी का पुनर्जीवन केवल जल संरक्षण की परियोजना नहीं है, बल्कि इसे गया और बोधगया की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संभावनाओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यदि प्रस्तावित योजनाएं धरातल पर उतरती हैं तो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने के साथ आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर, हरित क्षेत्र और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
जीतन राम मांझी और ‘नमामि निरंजना अभियान’ के संस्थापक संजय सज्जन सिंह की ओर से लंबे समय से फल्गु नदी के पुनर्जीवन की मांग और प्रयास किए जा रहे थे। अब केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों के स्तर पर हुई यह बैठक परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
