Khabrilal Live Desk: पटना, 8 अगस्त 2026: बिहार में मानव तस्करी (Human Trafficking Bihar)और बच्चों के लापता होने के मामलों को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मानव तस्करी के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है और तस्करों के विरुद्ध कठोर एवं त्वरित कार्रवाई सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी से मुक्त कराए गए लोगों को केवल बरामद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पुनर्वास, कौशल विकास, रोजगार और सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी सरकार का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को पटना के ज्ञान भवन में गृह विभाग की ओर से आयोजित ‘गुमशुदा बच्चों और मानव तस्करी (Human Trafficking Bihar) पर पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन’ (Eastern Zonal Conference-cum-Consultation on Missing Children and Human Trafficking) का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। सम्मेलन में लापता बच्चों की बरामदगी, मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के पुनर्वास तथा पूर्वी राज्यों के बीच समन्वय समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
रोजगार और कौशल विकास से मानव तस्करी (Human Trafficking Bihar) पर लगेगा अंकुश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मानव तस्करी (Human Trafficking Bihar) की रोकथाम के लिए रोजगार और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। लोगों को सुरक्षित और वैध रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने से मानव तस्करी के जोखिम को कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने और औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। हाल में विभिन्न स्टील उद्योग समूहों के साथ करीब 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक के समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि बिहार में ही रोजगार और बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध हों, ताकि लोगों को मजबूरी में पलायन न करना पड़े।
‘नया सवेरा 3.0’ से मानव तस्करी (Human Trafficking Bihar) के खिलाफ अभियान तेज
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘नया सवेरा 1.0’ और ‘नया सवेरा 2.0’ के बाद अब ‘नया सवेरा 3.0’ अभियान के माध्यम से मानव तस्करी (Human Trafficking Bihar) के खिलाफ जागरूकता, रोकथाम, बचाव और पुनर्वास की गतिविधियों को और व्यापक बनाया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य है कि तस्करी से मुक्त कराए गए प्रत्येक व्यक्ति को केवल राहत नहीं, बल्कि कौशल, रोजगार और सम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन का अवसर मिले।
1,200 से अधिक लापता बच्चों की हो चुकी है बरामदगी
मुख्यमंत्री ने बताया कि लापता बच्चों और व्यक्तियों (Human Trafficking Bihar)से जुड़े मामलों में कार्रवाई को समयबद्ध बनाने के लिए बिहार में रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत राज्य में अब तक लगभग 1,200 से अधिक लापता बच्चों की बरामदगी हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि लोगों की शिकायतों के 30 दिनों के भीतर निष्पादन के लिए सहयोग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से अब तक 5.50 लाख से अधिक मामलों का निष्पादन किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, मामलों के निष्पादन में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। यदि किसी पीड़ित को अधिकारी स्तर पर न्याय नहीं मिलता है या वह संतुष्ट नहीं होता है, तो सरकार प्रत्येक माह के दूसरे मंगलवार को ऐसे मामलों की सुनवाई करती है।
उन्होंने बताया कि पिछले राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम में प्राप्त 129 आवेदनों में से संबंधित मामलों के 100 आवेदनों का समाधान किया गया।
पीड़ितों को न्याय के साथ सम्मानजनक जीवन देना लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ शिकायतों का निपटारा करना नहीं है, बल्कि पीड़ित व्यक्ति को वास्तविक न्याय और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है। मानव तस्करी से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार मानव तस्करी ( की रोकथाम के लिए संबंधित राज्यों, पुलिस, प्रशासन, न्यायपालिका और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर समन्वित प्रयास करेगी।
पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार में बड़ी संख्या में महिलाएं पुलिस बल में भागीदारी निभा रही हैं। राज्य में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट का गठन भी किया गया है, जिससे बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशील और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि बच्चों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
पलायन रोकने के लिए औद्योगिक निवेश पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उद्योगों के आने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लोगों का आर्थिक सशक्तीकरण होगा। इससे अनियोजित एवं मजबूरी के पलायन को भी कम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश की संभावनाएं हैं और सरकार राज्य में रोजगार एवं बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बिहार के बाहर रहने वाले लोगों से भी राज्य में लौटकर अपनी प्रतिभा और अनुभव का इस्तेमाल बिहार के विकास में करने का आह्वान किया।
बाढ़ की चुनौती से निपटने के लिए भी सरकार की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विकास के साथ-साथ बाढ़ जैसी चुनौतियों का स्थायी समाधान भी सरकार की प्राथमिकता है। उत्तर बिहार में बाढ़ की समस्या को कम करने के लिए जल प्रबंधन और सिंचाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
राज्य में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ बड़ी नदियों गंगा, गंडक (नारायणी) और कोसी को जोड़ने तथा जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
केंद्र सरकार से सहयोग का भरोसा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के सपने को साकार करने की दिशा में बिहार सरकार प्रतिबद्ध है।
उन्होंने सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों, अधिकारियों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि मिसिंग चिल्ड्रेन और ह्यूमन ट्रैफिकिंग की रोकथाम, लापता लोगों की बरामदगी तथा उनके पुनर्वास के लिए बिहार सरकार हरसंभव सहयोग करेगी।
कार्यक्रम में मानव तस्करी पर आधारित एक वीडियो फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें इसके दुष्प्रभाव, बचाव और कार्रवाई के विभिन्न पहलुओं को दिखाया गया।
सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. अमानुल्लाह, पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद, बिहार के महाधिवक्ता, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, पूर्व पुलिस महानिदेशक पी.के. नागर, मानक कार्य प्रणाली निर्माण समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
