Khabrilal Live Desk: पटना, 16 सितंबर 2026। सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस ₹45 से बढ़ाकर ₹75 प्रति वस्तु (Gold Hallmarking Fee Hike) किए जाने पर ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने गंभीर चिंता जताई है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की 14 सितंबर 2026 की अधिसूचना के तहत लागू इस वृद्धि को फेडरेशन ने 66.67 प्रतिशत बताते हुए सरकार से तत्काल पुनर्विचार की मांग की है। लागू कर अलग से देय होंगे।

AIJGF का कहना है कि हॉलमार्किंग और उपभोक्ता संरक्षण जरूरी हैं, लेकिन इसकी अनुपालन लागत में एकमुश्त और इतनी बड़ी वृद्धि ऐसे समय में की गई है, जब आभूषण उद्योग पहले से ही ऊंची सोने की कीमतों, कमजोर मांग, घटती बिक्री और सीमित लाभ मार्जिन की चुनौती से गुजर रहा है।

फेडरेशन के अनुसार, रिकॉर्ड सोना कीमतों के कारण ग्राहक भारी आभूषणों की जगह हल्के वजन और कम बजट वाली ज्वेलरी को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में प्रति वस्तु हॉलमार्किंग शुल्क बढ़ने का सबसे अधिक असर छोटे आकार और कम कीमत वाले आभूषणों पर पड़ेगा। अंगूठी, नोज पिन, पेंडेंट, बच्चों के आभूषण और छोटे ईयररिंग्स जैसी वस्तुओं पर प्रत्येक पीस के हिसाब से शुल्क लगने के कारण कुल अनुपालन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

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AIJGF बिहार अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि आभूषण उद्योग इस समय कम बिक्री, ऊंची पूंजी लागत और सीमित लाभ मार्जिन से जूझ रहा है। ऐसे दौर में हॉलमार्किंग फीस को ₹45 से सीधे ₹75 करना छोटे ज्वेलर्स और कारीगर आधारित इकाइयों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालेगा।

उन्होंने कहा कि मुद्दा केवल ₹30 की वृद्धि का नहीं है, बल्कि एक आवश्यक अनुपालन व्यवस्था की लागत में 66.67 प्रतिशत की वृद्धि का है। यदि ज्वेलर इस लागत को स्वयं वहन करता है तो उसका लाभ मार्जिन प्रभावित होगा और यदि इसे ग्राहक पर डाला जाता है तो आभूषण की कीमत बढ़ेगी। AIJGF के अनुसार, दोनों ही परिस्थितियां उद्योग और उपभोक्ता के लिए चुनौतीपूर्ण हैं।

वर्मा ने सरकार से निर्णय की तत्काल समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि हॉलमार्किंग व्यवस्था को राजस्व बढ़ाने के माध्यम के बजाय शुद्धता, विश्वास और उपभोक्ता संरक्षण की व्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए।

AIJGF बिहार महासचिव प्रेम नाथ गुप्ता ने कहा कि सोने की कीमत पहले ही आम ग्राहक की पहुंच को चुनौती दे रही है। ज्वेलर्स कम वजन और किफायती आभूषणों के माध्यम से मांग बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन प्रति वस्तु शुल्क में वृद्धि ऐसी ज्वेलरी को अनुपातहीन रूप से महंगा कर सकती है।

उन्होंने कहा कि ₹75 का शुल्क पांच ग्राम और आधा ग्राम की वस्तु पर समान रूप से लागू होता है। इसलिए कम वजन और कम मार्जिन वाले आभूषणों पर इसका प्रतिशत प्रभाव अधिक पड़ सकता है। इससे छोटे ज्वेलर्स की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होने की आशंका है।

प्रेम नाथ गुप्ता ने कहा कि AIJGF हॉलमार्किंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के पक्ष में है, लेकिन अनुपालन की लागत व्यावहारिक और न्यायसंगत होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि हॉलमार्किंग की लागत में ऐसा कौन-सा बदलाव आया है, जिसके कारण फीस में एक साथ 66.67 प्रतिशत की वृद्धि आवश्यक हुई।

AIJGF ने केंद्र सरकार और BIS के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखी हैं—

  • बढ़ी हुई हॉलमार्किंग फीस की तत्काल समीक्षा कर इसे फिलहाल ₹45 प्रति वस्तु पर बहाल किया जाए।
  • किसी भी संशोधित शुल्क को लागू करने से पहले ज्वेलर्स, कारीगरों, हॉलमार्किंग केंद्रों और उपभोक्ता संगठनों से व्यापक परामर्श किया जाए।
  • हल्के वजन और कम मूल्य वाले आभूषणों के लिए रियायती शुल्क अथवा अलग स्लैब बनाया जाए।
  • सूक्ष्म एवं लघु ज्वेलर्स के लिए विशेष राहत या शुल्क सहायता व्यवस्था लागू की जाए।
  • शुल्क वृद्धि के लागत-आधार और उसके प्रभाव का पारदर्शी विवरण सार्वजनिक किया जाए।
  • भविष्य में शुल्क वृद्धि को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि छोटे कारोबारियों और उपभोक्ताओं पर अचानक अतिरिक्त बोझ न पड़े।

फेडरेशन ने यह भी कहा कि चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस ₹35 प्रति वस्तु पर अपरिवर्तित रखी गई है। ऐसे में AIJGF ने सोने की हॉलमार्किंग फीस में हुई बड़ी वृद्धि के औचित्य पर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

AIJGF ने केंद्र सरकार और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय से त्योहारों और आगामी विवाह सीजन से पहले इस निर्णय की समीक्षा करने का आग्रह किया है। फेडरेशन का कहना है कि उद्योग पहले से ही ऊंची सोने की कीमतों, कमजोर मांग, घटते वॉल्यूम और सीमित मार्जिन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में छोटे ज्वेलर्स, स्वर्णकारों और कारीगरों को राहत देने वाली नीति की आवश्यकता है।

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