महिलाओं का उत्थान और नीतीश कुमार के ऐतिहासिक प्रयास: इतिहास के पन्नों में हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेंगे:आप बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जितनी भी आलोचना कर लें, महिलाओं के संदर्भ में उनके हाल के बयानों का पोस्टमार्टम कर लें, लेकिन बिहार की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए इस समाजवादी नेता ने जो कार्य किया है, वह इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। महिलाओं के उत्थान के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों को नकार देना अन्याय से कम नहीं है।

मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना पुरे विश्व में चर्चा का विषय बनी

नीतीश कुमार द्वारा वर्ष 2006 में बालिका साइकिल योजना शुरू करने से पहले उच्च विद्यालय और महाविद्यालयों में बालक और बालिका विद्यार्थियों के अनुपात में भारी अंतर था। इस योजना ने लाखों लड़कियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे स्कूल छोड़ने की दर में भारी गिरावट आई। यह योजना पूरे विश्व में चर्चा का विषय बनी। इसके अलावा, बिहार सरकार ने सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35% आरक्षण की व्यवस्था कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया।

महिला नेतृत्व को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने 2006 में पंचायती राज संस्थानों और 2007 में नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया। आज प्रदेश की 60% मुखिया महिलाएं हैं, जो ग्रामीण स्तर पर नेतृत्व कर रही हैं और स्थानीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह पहल महिलाओं को राजनीतिक सशक्तिकरण की ओर ले जाने का एक बड़ा प्रयास है।

महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक मजबूती के लिए मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत सरकार ने मैट्रिक पास करने पर ₹10,000, इंटर पास करने पर ₹25,000 और स्नातक उत्तीर्ण करने पर ₹50,000 की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह योजना गरीब परिवारों की बेटियों को पढ़ने और आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है।

महिलाओं का उत्थान और नीतीश कुमार के ऐतिहासिक प्रयास: शराबबंदी महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं !

महिलाओं के हित में नीतीश कुमार द्वारा लिया गया एक और साहसिक फैसला शराबबंदी है, जो 2016 में लागू की गई थी। भले ही शराबबंदी पूर्ण रूप से सफल न हुई हो, लेकिन इसके सामाजिक प्रभाव साफ दिखे हैं। इससे घरेलू हिंसा के मामलों में कमी आई है, और महिलाओं के हाथ में आर्थिक बचत बढ़ी है, जिसका वे अपने बच्चों के भविष्य निर्माण में उपयोग कर रही हैं।

क्या कोई इन उपलब्धियों और प्रयासों को झुठला सकता है? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार की महिलाओं को सिर्फ सपने देखने का हौसला नहीं दिया, बल्कि उनके सपनों को पूरा करने के लिए ठोस ज़मीन भी तैयार की है। उनकी आलोचना करने से पहले विपक्ष के नेताओं और वरिष्ठ व गरिष्ठ पत्रकारों को इन ऐतिहासिक प्रयासों और उनके सकारात्मक परिणामों का अध्ययन जरूर करना चाहिए।

बिहार में महिलाओं के सशक्तिकरण की यह बुनियाद इतिहास के पन्नों में हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगी। आज भले इस बुजुर्ग नेता को भला-बुरा कह लें, लेकिन इतिहास न्याय जरूर करेगा।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में व्यक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं। लेखक, अमित कुमार, एक राजनीतिक विश्लेषक हैं, जो पिछले 6 वर्षों से विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लिख रहे हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में परास्नातक (PG) किया है।

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