Sharda Sinha News: बीमारी से लगातार लड़ने के बाद बिहार की लोकप्रिय गायिका के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली शारदा सिन्हा का मंगलवार (05 नवंबर) को निधन हो गया. दिल्ली स्थित एम्स में उन्होंने आखिरी सांस ली. बता दें कि शारदा सिन्हा करीब सात साल से मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित थीं। यह एक तरह ब्लड कैंसर है।
उनकी तबीयत बिगड़ने पर 26 अक्टूबर को एम्स के कैंसर सेंटर में भर्ती किया गया था। तब उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा था। शारदा सिन्हा को चार नवंबर को अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। हाल ही में शारदा सिन्हा के पति बृज किशोर सिन्हा का भी निधन हो गया था। जिसके बाद से वह सदमे में थीं।
शारदा सिन्हा भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी वो आवाज अमर है, जो छठ के अवसर पर घाटों पर गूंजकर लोगों को भावविभोर कर देती थी। उनकी आवाज हमेशा जिंदा रहेगी, जिसे सुनकर दूर देश में बसे लोग भी छठ पर घर लौटने की बेचैनी महसूस करेंगे।

Sharda Sinha News: पीएम मोदी ने जताया दुःख
शारदा सिन्हा के निधन के बाद पीएम मोदी ने X (पहले ट्विटर) पर दुख जताते हुए लिखा, ‘सुप्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उनके गाए मैथिली और भोजपुरी के लोकगीत पिछले कई दशकों से बेहद लोकप्रिय रहे हैं। आस्था के महापर्व छठ से जुड़े उनके सुमधुर गीतों की गूंज सदैव बनी रहेगी। उनका जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं।ओम शांति!’

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हुए भावविभोर
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार कोकिला, पद्म श्री एवं पद्म भूषण से सम्मानित शारदा सिन्हा (Sharda Sinha News) के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि बिहार कोकिला, पद्म श्री एवं पद्म भूषण से सम्मानित शारदा सिन्हा जी का निधन दुःखद। वे मशहूर लोक गायिका थीं। उन्होंने मैथिली, बज्जिका, भोजपुरी के अलावा हिन्दी गीत भी गाये थे।

उन्होंने कई हिन्दी फिल्मों में भी अपनी मधुर आवाज दी थी। स्व० शारदा सिन्हा जी के छठ महापर्व पर सुरीली आवाज में गाए मधुर गाने बिहार और उत्तर प्रदेश समेत देश के सभी भागों में गूंजा करते हैं। उनके निधन से संगीत के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। उनकी आत्मा की चिर शांति तथा उनके परिजनों एवं प्रशंसकों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना है।
Sharda Sinha News: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) से संगीत में किया पीएचडी
शारदा सिन्हा ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से संगीत में पीएचडी किया। इस उन्नत डिग्री ने उन्हें संगीत का गहराई से अध्ययन करने, इसके सिद्धांत, इतिहास और सांस्कृतिक महत्व की खोज करने का मौका दिया। शारदा ने मगध महिला कॉलेज और प्रयाग संगीत समिति से भी प्रशिक्षण लिया था। साल 1991 में शारदा सिन्हा को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था और साल 2018 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

Sharda Sinha News: आंगन से आरंभ हुआ लोक गीतों का सफर
विभिन्न भाषाओं के गीतों को आवाज देने वाली शारदा सिन्हा ने अपने गीतों की शुरूआत भाई की शादी में गीत गा कर की थी। उन्होंने एकबार स्वयं कहा था कि पहली बार मैंने अपने भाई की शादी में गीत गाए थे। शादी में भाई से नेग मांगने को लेकर उन्होंने चुकैओ, हे दुलरुआ भैया, तब जहिया कोहबर आपन.. गीत गाए थे। इनके गीत को घर में खूब सम्मान मिला था।
Sharda Sinha News: बालीवुड में सुपरहिट गाना गा चुकी हैं
उन्होंने पहली बार बालीवुड अभिनेता सलमान खान की सुपरहिट फिल्म मैंने प्यार किया के लिए गीत गाया था।शारदा सिन्हा ने राजश्री प्रोडक्शन की सुपरहिट फिल्म हम आपके हैं कौन का गाना बाबुल जो तुमने सिखाया… , मैंने प्यार किया का गाना कहे तोहसे सजना ये तोहरी सजानियां… जैसे गानों को अपनी आवाज दी थीं। कहे तोहसे सजना ये तोहरी सजानियां के लिए उन्हें मात्र 76 रूपये मिले थे। इनकी आवाज को लोगों ने खूब सराहा था। इसके अलावा गैंग्स आफ वासेपुर पार्ट टू और चार फुटिया छोकरे जैसी फिल्मों में अपनी आवाज दी। अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स आफ वासेपुर में तार बिजली से पतले हमार पिया, ओ री सासु बता तूने ये क्या किया… गीत काफी लोकप्रिय हुआ।

Sharda Sinha News: कई पुरस्कार से हुईं थी सम्मानित
- 1991 : पद्मश्री सम्मानित
- 2001 : संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
- 2006 : राष्ट्रीय अहिल्या देवी पुरस्कार
- 2015 : बिहार सरकार की ओर से सम्मानित
- 2018 : पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित
साहसी महिला थी शारदा सिन्हा
जब शारदा सिन्हा ने गाना शुरू किया, उस दौर में एक संभ्रांत परिवार की महिला के लिए मंच पर जाकर गाना गाना आसान नहीं था। यह परंपरा और समाज के ढांचे को चुनौती देने वाला साहसी कदम था। शारदा सिन्हा की जीवन यात्रा उनके आत्मसंघर्ष और कला साधना के उन पहलुओं को समेटे हुए है, जो उनकी कला को एक नए और परिवर्तनकारी आयाम देते हैं।
सुपौल जिले के हुलास गांव में जन्मीं शारदा आठ भाइयों की इकलौती बहन थीं। मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी शारदा सिन्हा के पिता सुखदेव ठाकुर बिहार सरकार के शिक्षा विभाग में अधिकारी थे। बचपन से ही उन्हें संगीत व नृत्य में रूचि थी। मैथिली लोक गीत से उनका प्रेम प्रगाढ़ था। बेगूसराय के सिंहमा में ससुराल थी। वे समस्तीपुर महिला कालेज में संगीत की प्रोफेसर और एचओडी के रूप में कुछ वर्षों तक सेवारत रहीं।

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