Smart Prepaid Meter: पटना, 06 अक्टूबर 2024: शोषित समाज दल के तत्वाधान में जन संघर्ष मोर्चा और राजनैतिक तीसरा मोर्चा के सौजन्य से रामलखन महतो फ्लैट में स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना के खिलाफ एक धरना आयोजित किया गया। धरने की अध्यक्षता अखिलेश कुमार ने और संचालन संजय श्याम ने किया । धरना को संबोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता देवरतन प्रसाद ने कहा कि मुख्यमंत्री की स्मार्ट मीटर परियोजना पूरी तरह से जनविरोधी है । इसके खिलाफ में विद्युत उपभोक्ता महासंघ ने उच्च न्यायालय , पटना में एक याचिका दायर किया । याचिका संख्या 17601/21 बिहार सरकार बनाम विद्युत उपभोक्ता महासंघ पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने फैसला देते हुए कहा कि यह योजना अव्यवहारिक है । प्रीपेड मीटर वैकल्पिक होगा, बाध्यकारी नहीं होगा । फिर भी सरकार इसे लगाने पर उतारू है जो असंवैधानिक है। इसलिए इसका जमकर विरोध करना हमारा परम कर्तव्य बन जाता है।
Smart Prepaid Meter की विश्वसनीयता पर शक
जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष प्रदीप मेहता ने कहा कि पहले जो मीटर लगता था उसे पहले टेस्ट किया जाता था जिसे एमआरटी टेस्ट कहा जाता था पर अब प्रीपेड मीटर सीधे कंपनी से आकर लगा है । इसलिए इसकी विश्वसनीयता पर शक है । यह योजना कमीशन पर आधारित है । बगैर विपक्षी दलों, विद्युत उपभोक्ता संगठनों से राय मशविरा किए सरकार अपने हठ पर अडिग है । गरीब राज्यों की सूची में अंतिम पायदान पर खडे राज्य बिहार में सरकार प्रीपेड मीटर को आम जन के भारी विरोध के बाद भी लगाने पर कमर कसे हुए है । फिलहाल बिहार में 1 करोड 79 .65 लाख विद्युत उपभोक्ता हैं जिसमें लोगों की अरुचि और विरोध के चलते मात्र 9 लाख 25 हजार घरों में ही प्रीपेड मीटर लग पाया है । जहाँ लगा है वहां आशंका के अनुरूप शिकायतों का अंबार शुरू हो गया है। प्रीपेड मीटर लगने की तिथि से ही अखबारों व मीडिया में इस संबंध में आ रही अनियमितता एवं अधिक चार्ज की शिकायतें इसके जनविरोधी होने का प्रमाण दे रही हैं।
बिहार जैसे गरीब राज्य के लिए Smart Prepaid Meter स्वीकार्य नहीं है
भारतीय मोमिन फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष महबूब आलम अंसारी , शोषित समाज दल के उदयन राय ने कहा कि दुखद स्थिति यह है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद भी सरकार अपने मनमानापन पर उतारू है । गौरतलब है कि केन्द्र सरकार के नेतृत्व में 7 दिसंबर,2017 को दिल्ली में ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में सर्वसम्मति से निर्णय हुआ था कि प्रीपेड मीटर लगाना उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होगी, बाध्यकारी नहीं । डरा – धमकाकर जबरदस्ती मीटर लगाना विद्युत उपभोक्ता संरक्षण कानून,2019 की धारा 2 / 7 के विपरीत है । । इतना ही नहीं पुराने मीटर की खरीदी कीमत अधिकतम 500 रु थी । प्रति प्रीपेड मीटर की कीमत साढे सात हजार रू पड़ता है जो उपयोक्ताओं के टैक्स के पैसे की सरासर लूट है और बिहार जैसे गरीब राज्य के लिए कहीं से भी स्वीकार्य नहीं है।

Smart Prepaid Meter की वजह से साइबर क्राइम की घटनाओं में हो रहा तेजी से इजाफा
फारवर्ड ब्लॉक के अनिल शर्मा, तीसरा मोर्चा के संयोजक वी वी सिंह ने कहा कि यह सर्वमान्य सत्य है और नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में भी कहा है कि बिहार एक पिछड़ा राज्य है जहाँ 51.91 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे गुजर – बसर करती है । और तुलनात्मक रुप से साक्षरता दर काफी नीचे है । प्रीपेड मीटर को रिचार्ज करने के लिए स्मार्ट फोन के साथ तकनीकी ज्ञान का होना जरूरी है । यहाँ दोनों का घोर अभाव है । ऐसे में बिहार जैसे पिछड़े राज्य में यह योजना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है । जहाँ मीटर लगा है वहाँ से ज्यादा बिल की शिकायतें लगातार आ रही हैं । साथ ही रिचार्ज करने के लिए सर्वर डाउन की समस्या लगातार बढ़ रही है । प्रीपेड मीटर लगने के बाद प्रतिदिन साइबर क्राइम की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है जहाँ बिजली कटने की बात कहकर और रिचार्ज का विकल्प देकर ये शातिर लोगों के खाते से पैसा उड़ा ले रहे हैं । भुक्तभोगियों में आम आदमी से लेकर सेवानिवृत डीआईजी तक के लोग हैं।
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उपस्थित सभी लोगों ने जोरदार नारे के साथ इस योजना का विरोध किया और वापसी तक आन्दोलन जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया। धरना में सुरेन्द्र ठाकुर, नवीनकांत मेहता, सरस्वती पासवान, नसीम अहमद कमाल, डा। विनय सिंह, राजाराम चौधरी, दिलीप कुमार, रामप्रसाद मेहता, रविरंजन कुमार, विष्णुशंकर सिंह आदि की सराहनीय भूमिका थी।
