तेजस्वी कसी कमर, 85 फीसदी आरक्षण दिलवा के रहेंगे !

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले प्रदेश में आरक्षण को लेकर घमासान मचा हुआ है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शीतकालीन सत्र के दुसरे दिन ( 26 नवंबर ) को इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। विधानसभा में आरक्षण के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ है। इस हंगामे के बीच विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया है। तेजस्वी यादव ने 65 फीसदी आरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की सरकार में 65 फीसदी आरक्षण दिया गया था। जिसको भाजपा के लोगों ने कोर्ट जाकर निरस्त करवा दिया।

65 से बढ़ाकर 85 फीसदी आरक्षण करने की मांग

आज बुधवार ( 27 नवंबर) को एकबार फिर से तेजस्वी यादव ने इस मुद्दा को उठाते हुए आरक्षण की सीमा 85% तक बढ़ाने का मांग किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा है, ‘महागठबंधन की हमारी 𝟏𝟕 महीनों की सरकार ने बिहार में जाति आधारित सर्वे करवा 𝟐 अक्टूबर 𝟐𝟎𝟐𝟑 को जाति गणना के सर्वे को प्रकाशित कर 𝟗 नवंबर 𝟐𝟎𝟐𝟑 को बिहार में आरक्षण की सीमा 𝟔𝟓% तक बढ़ा उसे तत्काल प्रभाव से सरकारी नियुक्तियों में लागू कराने का निर्णय लिया गया।

आरक्षण विरोधी है बीजेपी

उसके बाद हमने इसे संविधान की 𝟗वीं अनुसूची में शामिल कराने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा। लेकिन दलितों-पिछड़ों-अतिपिछाड़ों और आदिवासियों के आरक्षण की धुर विरोधी बीजेपी सरकार ने एक साल बाद भी अभी तक इसे स्वीकृत नहीं किया है।’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 𝟔𝟓% आरक्षण सीमा को संविधान की 𝟗वीं अनुसूची में नहीं डालने से आरक्षित वर्गों यथा दलितों-पिछड़ों-अतिपिछड़ों और आदिवासियों को लाखों पदों पर नौकरियों का नुकसान हो रहा है। अगर 𝐍𝐃𝐀 सरकार 𝟔𝟓% आरक्षण सीमा का समर्थन नहीं करती है तो इसका सीधा अर्थ है कि 𝟔𝟓% आरक्षण के अनुसार सरकारी नौकरियों में आरक्षित वर्गों को 𝟏𝟔% कम नौकरियां मिलेंगी। इसके लिए नीतीश सरकार दोषी है।’

85 फीसदी आरक्षण देने की मांग

तेजस्वी यादव ने कहा कि जदयू के बल पर यह सरकार चल रही है लेकिन अब मुख्यमंत्री जी सहित पार्टी में नैतिक और वैचारिक साहस नहीं है कि बाबा साहेब के आरक्षण विरोधी केंद्र सरकार को इसे नौवीं अनुसूची में शामिल करने पर मजबूर कर सके। बीजेपी के लोगों ने पिछले दरवाज़े से 𝟔𝟓% आरक्षण सीमा को निरस्त कराया। अब हमारी माँग है कि बिहार सरकार पुन: एक नया विधेयक लाकर इसकी सीमा को 𝟖𝟓% (𝟕𝟓+𝟏𝟎) तक बढ़ाये और इसे 𝟗वीं अनुसूची में सम्मिलित करने का प्रस्ताव 𝐍𝐃𝐀 की केंद्र सरकार को भेंजे।

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