Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे करीब आ रहा है, सियासी सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि गठबंधन के बीच सीटों का बंटवारा कैसे होगा। यानी, सीटों के तालमेल को लेकर राजनीतिक खींचतान चरम पर है।
एनडीए में फिलहाल सीटों की मांग को लेकर वैसी बयानबाजी नहीं हो रही है, लेकिन महागठबंधन में अंदरूनी खींचतान साफ नजर आ रही है। एक तरफ कांग्रेस 70 से अधिक सीटों की मांग कर रही है, तो वहीं मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी 2025 के विधानसभा चुनाव में कम से कम 60 सीटों की मांग कर रही है। आपको बता दें कि पिछले चुनाव में मुकेश सहनी एनडीए के साथ थे और 11 सीटों पर चुनाव लड़ा था और चार सीटों पर जीत दर्ज की थी।
Bihar Elections 2025: सीटों के तालमेल पर सियासी घमासान
निषाद आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति करने वाले मुकेश सहनी के लिए यह आसान नहीं होगा। यदि राजद उनकी पार्टी को 30-40 सीटें देने को तैयार हो जाती है, तो कांग्रेस की सीटों में कटौती लगभग तय है। जानकारी के मुताबिक, पिछली बार ग्रैंड ओल्ड पार्टी को सीट बंटवारे के तहत 70 सीटें मिली थीं, जिनमें से वह मात्र 19 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई थी। राजनीतिक विश्लेषकों और राजद नेताओं का मानना है कि कांग्रेस की कमजोर प्रदर्शन के कारण ही तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनने से चूक गए थे। हालांकि, यह भी सच है कि राजद ने कांग्रेस को चुन-चुन कर कठिन सीटें दी थीं, जहां एनडीए का दबदबा पहले से कायम था।
राजद इस बार 144 या उससे अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति बना रही है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि 2025 का चुनाव तेजस्वी यादव के लिए मुख्यमंत्री बनने का सुनहरा अवसर है, जिसे किसी भी हाल में हाथ से जाने नहीं दिया जा सकता। राजद इस समय महागठबंधन की सबसे प्रभावशाली और जनाधार वाली पार्टी है, जिसका बिहार की राजनीति में मजबूत पकड़ है। ऐसे में अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़कर राजद सत्ता की सीढ़ी चढ़ने का हरसंभव प्रयास कर रही है।
मुकेश सहनी की मांग, राजद के रणनीति का हिस्सा तो नहीं ?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी द्वारा 60 सीटों की मांग महज एक रणनीति हो सकती है। इससे राजद को कांग्रेस पर दबाव बनाने का मौका मिलेगा, जिससे कांग्रेस को कम सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया जा सके। साथ ही, बिहार में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की बढ़ती सक्रियता भी राजद को रास नहीं आ रही है। विश्लेषकों के अनुसार, लालू प्रसाद यादव राजनीतिक मजबूरी में भले ही कांग्रेस के साथ समझौता कर लें, लेकिन वे और उनकी पार्टी कभी नहीं चाहेंगे कि बिहार में कांग्रेस या उसके नेता मजबूत हों।
राजनीतिक विश्लेषक अमित कुमार का मानना है कि वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी द्वारा 60 सीटों की मांग महज एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, जिसके जरिये राजद कांग्रेस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। इसका सीधा मकसद यह है कि कांग्रेस को कम सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया जाए, ताकि महागठबंधन में राजद की पकड़ और मजबूत हो सके। वहीं, बिहार में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की बढ़ती सक्रियता राजद के लिए एक चुनौती बनती जा रही है।
अमित कुमार कहते हैं कि लालू प्रसाद यादव भले ही राजनीतिक समीकरणों के तहत कांग्रेस के साथ खड़े दिखें, लेकिन राजद की यह पुरानी रणनीति रही है कि बिहार की राजनीति में कांग्रेस या उसके किसी भी नेता को इतना मजबूत न होने दिया जाए कि वे राजद के लिए खतरा बन सकें। ऐसे में सीट बंटवारे की यह लड़ाई महज संख्या का खेल नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की सियासी चाल है।
बिहार की राजनीति में सीटों का यह गणित आने वाले दिनों में और पेचीदा होता जाएगा, और सभी दलों की रणनीति का असली चेहरा तब सामने आएगा जब सीटों का अंतिम बंटवारा होगा।
