Varanasi Railway Bridge: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र और भगवान विश्वनाथ की नगरी वाराणसी को बड़ी सौगात मिलने वाली है। काशी में देश का सबसे चौड़ा रेल और रोड पुल बनाया जाएगा। बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इसको मंजूरी दी गयी। गंगा पर 137 साल पुराने मालवीय पुल के ठीक बगल में बनने वाले इस पुल पर ऊपर छह लेन की सड़क और नीचे चार लाइन का रेल ट्रैक होगा। बता दें कि पीएम मोदी इसी रविवार वाराणसी को अरबों की सौगात देने अपने संसदीय क्षेत्र आ रहे हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान पुल का शिलान्यास भी हो सकता है।

2642 करोड़ की लागत से बनेगा Varanasi Railway Bridge

इस पुल के बनने से यूपी से बिहार और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में रेल और सड़क मार्ग से आवागमन आसान और किफायती हो जाएगा। वहीं, लोगों का समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। करीब 2642 करोड़ की लागत से बनने वाले नए पुल से हर साल 8 करोड़ लीटर डीजल यानी 638 करोड़ रुपये की भी बचत होगी। अभी चंदौली से वाराणसी आने वाले बड़े वाहनों को 137 साल पुराने मालवीय पुल पर चढ़ना प्रतिबंधित है। ऐसे में इन वाहनों को डाफी बाइपास से आना होता है। इससे समय और ज्यादा डीजल खर्च करना होता है।

पुल निर्माण से आवागमन मे होगी आसानी

पुल के बारे में जानकारी देते हुए रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपनी प्रजेंटेशन में बताया कि इसका डीपीआर भी फाइनल हो गया है। चार लेन का रेलवे ट्रैक और सिक्सलेन की ऊपर सड़क का ब्लू प्रिंट भी साझा किया। रेलमंत्री ने बताया कि आने वाले 100 साल की रेलवे और सड़क यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस सिग्नेचर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। इसे 2028 यानी चार साल में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

137 साल पुराने मालवीय पुल के 50 मीटर सामानांतर बनने वाले सिग्नेचर ब्रिज से काशी, चंदौली, बिहार, एमपी और छत्तीसगढ़ का जुड़ाव होगा। चारों दिशाओं में परिवहन को रफ्तार मिलेगी। सिग्नेचर ब्रिज को डिजाइन 150 साल के लिए किया गया है। सिग्नेचर ब्रिज निर्माण के दौरान जो फाउंडेशन होगा, वह नदी के सतह से 120 फीट गहरा होगा। उसके ऊपर पीलर और फिर ब्रिज होगा।

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