Khabrilal Live Desk: गयाजी, 20 सितंबर। Gayaji Pitru Paksha Mela 2026-लखीबाग, मानपुर की रहने वाली चाहत वत्स बताती हैं कि, “सबसे पहले मैं गयाजी जिला पदाधिकारी को धन्यवाद देना चाहूंगी, जिन्होंने हमें यह बेहतरीन अवसर दिया। उन्होंने ‘पेंट द सिटी’ कार्यक्रम शुरू किया। इसके तहत हमने अपनी पेंटिंग बनाकर ईमेल के माध्यम से भेजी। हमारी पेंटिंग का चयन हुआ और हमें दीवारों पर उसे बनाने का अवसर मिला। इस कार्यक्रम की अच्छी व्यवस्था और प्रबंधन के लिए भी धन्यवाद देना चाहूंगी। हमें पेंटिंग से जुड़ी सभी आवश्यक सामग्री अच्छी तरह उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा, पूरे कार्यक्रम के दौरान हमारी सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया। सुबह स्नैक्स, फिर लंच और अन्य जरूरी व्यवस्था भी बहुत अच्छे तरीके से की गई। हमें अपनी कला को प्रदर्शित करने का यह अवसर देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।”

Gayaji Pitru Paksha Mela 2026: मधुबनी और मंजूषा कला से बदली गयाजी की तस्वीर
पितृपक्ष के दौरान बिहार का गयाजी शहर पितरों को मोक्ष दिलाने वाले पिंडदान और तर्पण अनुष्ठानों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हो जाता है। पितृ पक्ष में गया जी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार कई स्तरों पर तैयारी की गई है। इसी सिलसिले में पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 के अवसर पर गया जी के प्रमुख घाटों और दीवारों को बिहार की पारंपरिक लोककला मधुबनी और मंजूषा पेंटिंग से बेहद खूबसूरती से सजाया जा रहा है 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलने वाले पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

शहर की दीवारों पर पेंटिंग बनाकर उन्हें सुंदर और स्वच्छ बनाने की पहल बिहार की संस्कृति को सजीव करने का एक बेहतरीन तरीका है। पटना और मधुबनी जैसे शहरों में रेलवे स्टेशनों, सरकारी इमारतों और सार्वजनिक दीवारों पर कलाकारों और विद्यार्थियों द्वारा श्रमदान से ऐसी पेंटिंग्स बनाई गई हैं। ह कला बिहार की प्राचीन परंपरा को दर्शाती है, जिसमें प्राकृतिक रंगों, ज्यामितीय पैटर्न और लोक जीवन के प्रसंगों का उपयोग होता है।
पितृपक्ष के अवसर पर गयाजी का धार्मिक महत्व विशेष माना जाता है। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना से गयाजी पहुंचते हैं। पितृपक्ष के दौरान पूरा गयाजी नगर श्रद्धा, भक्ति और अध्यात्म के रंग में रंगा नजर आता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पुरोहित एक साथ पिंडदान करते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक वातावरण से भर उठता है।
इस अवसर पर बिहार सरकार और जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। इनमें अस्थायी आवास, सामुदायिक भोजन, स्वास्थ्य शिविर और यातायात व्यवस्था जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
Gayaji Pitru Paksha Mela 2026: पेंटिंग के जरिए दिखा पितृपक्ष और गयाजी की धार्मिक विरासत
रामधनपुर, कबड़ापर, शिव मंदिर के पास की रहने वाली तान्या बताती हैं कि, “हम सभी का चयन ‘पेंट द सिटी’ कार्यक्रम के लिए किया गया था। डीएम सर ने हमारी पेंटिंग का चयन किया और हमें यह कार्य करने का अवसर दिया। हमें पेंटिंग बनाने के लिए एक दीवार दी गई और इसके लिए आवश्यक सभी सामग्री भी डीएम सर की ओर से उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा, समय-समय पर हमारे स्नैक्स और नाश्ते की भी पूरी व्यवस्था की जाती है।”

Gayaji Pitru Paksha Mela 2026: पेंटिंग में दिखी ‘गयासुर की तपस्या और भगवान विष्णु का आशीर्वाद’
आगे वह बताती है कि, “यहां हमारी मैम भी हमेशा हमारे साथ रहती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि हमें किसी तरह की परेशानी न हो। हर प्लेटफॉर्म पर ऐसा अवसर नहीं मिलता। खासकर हम जैसे छोटे विद्यार्थियों को अपनी कला के माध्यम से आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा दिखाने का ऐसा मंच मिलना हमारे लिए बहुत बड़ी बात है। हमारे पीछे आप जो पेंटिंग देख रहे हैं, उसकी थीम ‘गयासुर की तपस्या और भगवान विष्णु का आशीर्वाद’ है। जिसमें दर्शाया गया है कि गयासुर ने किस प्रकार तपस्या की और भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद दिया।”
“मैं आईआईएम बोधगया की छात्रा हूं। इसी साल मेरा यहां एडमिशन हुआ है। पितृ पक्ष के शुभ अवसर पर मैं अपनी टीम, आईआईएम की टीम के साथ पेंटिंग प्रतियोगिता में भाग लेने आई हूं। जैसा कि हम सभी जानते हैं, पितृपक्ष शुरू हो चुका है। यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण अवसर होता है, क्योंकि इस दौरान हम अपने पूर्वजों का पिंडदान और श्राद्ध कर सकते हैं। पितृ पक्ष में पिंडदान का विशेष महत्व गया जी का है। मैं इस बात को लेकर बहुत खुश हूं कि यहां के प्रशासन और डीएम सर ने हमें यह अवसर दिया कि हम इस पवित्र अवसर पर अपनी कला के माध्यम से पितृ पक्ष के महत्व को प्रदर्शित कर सकें।” विदुषी मौर्य बताती है ।

आगे वह बताती है कि, “यहां हम अपनी पेंटिंग के माध्यम से पितृपक्ष और पिंडदान की परंपरा को दर्शा रहे हैं। हमारी पेंटिंग में दशरथ जी के पिंडदान से जुड़ी कथा को प्रदर्शित किया गया है। हमारा उद्देश्य है कि पितृपक्ष का महत्व हमारी पेंटिंग के माध्यम से लोगों तक पहुंचे। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को हमारी पेंटिंग पसंद आए और हमारी कला के माध्यम से गया जी की सुंदरता में भी योगदान हो सके।”
