Khabrilal Live Desk: 18 सितंबर, पटना। Shams Alam Asian Para Games 2026– बिहार सरकार राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए खेल के बुनियादी ढांचे को लगातार मजबूत कर रही है। खेलों के विकास के लिए बजट राशि में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। सरकार के निरंतर प्रयासों से राज्य में खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में लगातार सुधार हो रहा है। इसी का परिणाम है कि बिहार के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल के खेल आयोजनों में भी बिहार की प्रतिभाओं ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

Shams Alam Asian Para Games 2026: व्हीलचेयर से वर्ल्ड रिकॉर्ड तक

अब बिहार और बिहार वासियों के लिए एक और गौरवान्वित करने वाली खबर सामने आई है। जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक एशियन गेम्स-2026 का आयोजन होगा। इस प्रतियोगिता में बिहार के 11 खिलाड़ी, जिनमें 6 दिव्यांग खिलाड़ी शामिल हैं, भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस बार के एशियन गेम्स में बिहार की भागीदारी 120% बढ़ी है। वर्ष 2023 में आयोजित हांगझोऊ एशियन गेम्स में बिहार के 5 खिलाड़ी शामिल हुए थे। इस बार खिलाड़ियों की संख्या दोगुना से अधिक है।

पैरा एथलेटिक्स से शैलेश कुमार और सोमन राणा, पैरा पावरलिफ्टिंग से झंडू कुमार, पैरा स्विमिंग से मो. शम्स आलम शेख, पैरा बैडमिंटन से प्रमोद भगत और उमेश विक्रम कुमार, रग्बी से गुड़िया कुमारी और आरती कुमारी, सेपक टाकरा से बॉबी तथा क्रिकेट से ईशान किशन और वैभव सूर्यवंशी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

Shams Alam Asian Para Games 2026: हौसले और मेहनत से बनाई अलग पहचान

बिहार के मधुबनी जिले के ‘रथौस’ गांव के रहने वाले शम्स आलम का तीसरी बार एशियन पैरा गेम्स के लिए चयन हुआ है। इससे पहले वह 2018 में जकार्ता और 2022 में हांगझोउ एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा ले चुके हैं। बचपन से ही शम्स को खेलों का शौक था। उन्होंने अपने खेल करियर की शुरुआत कराटे से की और ब्लैक बेल्ट भी हासिल किया। इसके बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर एमबीए किया।

वर्ष 2010 में शम्स की रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में ट्यूमर विकसित हो गया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। सर्जरी सफल रही, लेकिन मेडिकल कॉम्प्लिकेशन की वजह से उनके शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह पैरालाइज हो गया। इसके बाद वे हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर आ गए। इस हादसे ने शम्स को अंदर से तोड़ दिया था, लेकिन उनके परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया।

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इसके बाद शम्स ने हार मानने के बजाय खुद को फिर से खड़ा करने की ठानी। रिहैबिलिटेशन के दौरान उनकी मुलाकात अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक राजाराम घाग से हुई। राजाराम घाग ने उन्हें तैराकी के जरिए जिंदगी में नई उम्मीद दी। इसके बाद शम्स ने 2012-13 से पेशेवर तैराकी की शुरुआत की।

साल 2017 में खुले समुद्र में 8 किलोमीटर तैरकर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद 2019 में पोलैंड की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने भारत का नाम रोशन किया। पटना में 14वें नेशनल तक्षशिला ओपन वाटर स्विमिंग के दौरान शिव घाट दीघा से लॉ कॉलेज घाट तक 13 किलोमीटर तैरकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना उनके संघर्ष की सबसे बड़ी मिसाल है।

शम्स को बिहार खेल रत्न पुरस्कार, कर्ण इंटरनेशनल अवॉर्ड और बिहार टास्क फोर्स में नियुक्ति जैसे सम्मान मिले हैं। हैदराबाद में आयोजित 25वीं पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि सीमाएं शरीर की होती हैं, सपनों की नहीं।

शम्स बताते हैं, “खेल और खिलाड़ियों को लेकर बिहार सरकार काफी बेहतर काम कर रही है। मुझे भी बिहार सरकार की योजना के तहत नौकरी मिली है। अभी मैं वित्त विभाग में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हूं। सरकार की योजनाओं के माध्यम से बिहार में खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिला है और खेल का विस्तार हुआ है।”

उनका संदेश साफ है कि बिहार सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए योजनाएं और सुविधाएं दे रही है। अब समय है कि युवा खेल को करियर के रूप में अपनाए। गौरतलब है कि खेल संस्कृति के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य के हर नगर और ग्राम पंचायत में खेल क्लब और मैदान का निर्माण किया जाता है। खेल छात्रवृत्ति योजना, ग्राम पंचायत खेल क्लब योजना और बिहार राज्य खेल सम्मान योजना इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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