Khabrilal Live Desk: पटना, 14 सितम्बर। BRICS 2026– मखाना बिहार का सुपर फूड बनकर उभरा है और इसने वैश्विक स्तर पर अपनी एक खास पहचान बनाई है। भारत का कुल मखाना उत्पादन में अकेले बिहार की हिस्सेदारी लगभग 75% से 85-90% तक है। वहीं बिहार का पारंपरिक सत्तू भूने हुए चने (या जौ) को पीसकर बनाया जाने वाला एक सुपर फूड है, जो राज्य की संस्कृति, सेहत और खानपान की पहचान है। यह एक ऐसा जादुई ड्रिंक है जो सिर्फ एक मिनट में बनकर तैयार हो जाता है। गर्मियों में ठंडक देने के साथ-साथ यह शरीर को पूरे दिन एनर्जेटिक और फिट रखता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो पेट को दुरुस्त रखता है।

बिहार का देसी सत्तू और मखाना अब सिर्फ लोकल लेवल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल स्टेज पर छा गया है। हाल ही में हुए ब्रिक्स समिट में दुनिया भर से आए पत्रकारों को जो तोहफे या किट दिए गए, उसमें बिहार के इन दोनों सुपरफूड्स को खास जगह मिली है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य विदेशी मेहमानों को भारतीय संस्कृति, विविधता और अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक स्वादों से परिचित कराना है। इसके अलावा मिथिला पेंटिंग की गैलरी में भी विदेशी मेहमानों की भी काफी मौजूदगी दिखी। BRICS जैसे बड़े मंच पर ‘ब्रांड बिहार’ की इस उपस्थिति से देश की ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच को और मजबूती मिल रही है।

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गौरतलब है कि BRICS Summit 2026 दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का 18वां शिखर सम्मेलन है। इस वर्ष भारत इसकी मेजबानी कर रहा है। 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस सम्मेलन में BRICS देशों के नेता और प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी। अब इसका विस्तार मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इंडोनेशिया जैसे देशों तक हो चुका है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया गौरव का पल

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी वेलकम किट में सत्तू और मखाना को शामिल किए जाने को राज्य के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा, “ग्लोबल स्टेज पर बिहार का गौरव! दिल्ली BRICS समिट के वेलकम किट में शामिल सत्तू और मखाना हमारे स्वाद, परंपरा और एंटरप्रेन्योरशिप की पहचान हैं।”

सम्राट चौधरी ने ‘लोकल से ग्लोबल’ के विजन को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया।उन्होंने कहा कि यह पहल बिहार को एक नई पहचान देने वाली है और इसके जरिए राज्य का स्वाद और उसकी समृद्ध परंपरा दुनिया के सामने पहुंच रही है।

बिहार के व्यंजन: संस्कृति और इतिहास के लेखक रविशंकर उपाध्याय कहते हैं कि, “ब्रिक्स सम्मेलन, नई दिल्ली में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया डेलीगेट्स के वेलकम किट में शामिल बिहार का सत्तू और मखाना हमारे स्वाद की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। सत्तू का उल्लेख जहां बौद्ध काल और महर्षि पाणिनि की अष्टाध्यायी यानी चौथी शताब्दी ई.पू. में आया है। वहीं मखाना भी हमारी स्वाद परम्परा में वर्षों से समाहित है। पूरी दुनिया के मखाना उत्पादन का 80% हिस्सा बिहार में होता है। बिहार का पारंपरिक स्वाद दुनिया के सामने लाने हेतु बिहार और भारत सरकार को साधुवाद। स्वाद के उद्यमियों को बधाई।”

जानिए किसान और व्यपारियों ने क्या कहा ?

​किसी भी छोटे स्टार्टअप के लिए लोकल बाजार से निकलकर इंटरनेशनल स्तर तक अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता। लेकिन जब सरकार का सहयोग और सही प्लेटफॉर्म मिलता है, तो छोटे कारोबार के बड़े सपने भी हकीकत में बदलने लगते हैं। BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर इन उत्पादों की मौजूदगी बिहार के स्थानीय कारोबारियों, किसानों और उत्पाद कों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सुपौल जिला के रहने वाले मनमोहन झा 10 बीघा से ज्यादा जमीन पर मखाना की खेती करते हैं। वह बताते हैं कि,” मखाना ने गांव में रहने लायक बना दिया है। धान गेहूं से काफी ज्यादा फायदा होता है। बिहार सरकार काफी प्रयासरत है। विदेशी मंच पर इसकी धूम और भी प्रोत्साहित कर रही है।”

मनमोहन झा, सुपौल जिला
मखाना किसान

वहीं सत्तु के लोकल व्यापार कर रहे नंदन मिश्र बताते हैं कि,” बिहार के हर घर में इसका उपयोग होता है। अगर भारत के हर घर में हो जाए तो बिहार का भी नाम होगा और किसान भी समृद्ध होंगे। हमारे जैसे उद्यमी को बिहार सरकार का काफी समर्थन मिला है। इस तरह का एक्टिविटी हम लोग को प्रोत्साहित करता है।”

सत्तू के कंपनी के तौर पर मधुबनी से शुरू हुए स्टार्टअप ‘Sattuz’ को BRICS सम्मेलन के वेलकम किट में शामिल किया गया है। संस्थापक सचिन कुमार ने BIADA और विदेश मंत्रालय का आभार जताते हुए कहा कि,”बिहार का पारंपरिक सत्तू अब वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहा है। हमारा प्रोडक्ट इंटरनेशनल लेवल पर जा रहा है। हर बिहार के लिए यह गर्व की बात है।”

‘Sattuz’ के संस्थापक सचिन कुमार

वहीं, दिल्ली में चल रहे BRICS सम्मेलन में विदेशी मेहमानों और पत्रकारों को दिए गए गिफ्ट पैक में पूर्णिया का अचारी मखाना भी शामिल किया गया है। कंपनी के हेड रवि कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि,” मखाना उद्योग स्थानीय लोगों को रोजगार देने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। खासकर बड़ी संख्या में महिलाओं को इससे रोजगार मिला है। मिथिला मखाना को GI टैग मिलने के बाद बिहार के मखाने की पहचान और मजबूत हुई है। अब लोग इसे सिर्फ बिहार या देश के स्तर पर ही नहीं जानते, बल्कि विदेशों में भी इसकी चर्चा हो रही है।”

पूर्णिया का अचारी मखाना के हेड रवि कुमार

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