भाग-1 (Bihar Assembly Election 2025): बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर अभी से सरगर्मियां तेज है। आज से हम एक सीरिज शुरू करने जा रहे हैं, जिसके तहत हमारी (khabrilal।Live) की टीम बारी-बारी प्रदेश के सभी 243 विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि, सामजिक ताना बाना, पिछले चुनवों के परिणाम आदि की प्रमाणिक जानकारी देने का प्रयास करेगी। भाग-1 में हम अमनौर विधानसभा (Amnour Election 2020) क्षेत्र की बात करेंगे।
अमनौर विधानसभा में वर्ष 2010 में पहली बार हुआ था चुनाव
वर्ष 2009 में अमनौर विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया था। वहीं, वर्ष 2010 में अमनौर विधानसभा क्षेत्र के लिए पहला चुनाव हुआ, जिसमें एनडीए गठबंधन के प्रत्याशी के रुप में जदयू के कृष्ण कुमार सिंह उर्फ मंटू ने विजय हासिल कर अमनौर का प्रथम विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया। इस विधानसभा क्षेत्र में अमनौर की 18 पंचायतों के साथ मकेर प्रखंड की 8 तथा परसा प्रखंड की 6 पंचायतों को शामिल किया गया है।
100 फीसदी ग्रामिण वोटरों वाला विधानसभा क्षेत्र है अमनौर
अमनौर विधानसभा (Amnaur Assembly Election 2025) सीट में 100 फीसदी ग्रामिण लोग हैं। यहां की ज्यादातर जनता खेती पर निर्भर है। बताया जाता है कि किसानों के लिए खेती और उसके लिए पानी की समस्या यहां के लिए इस बार भी मुद्दा हो सकती है। सिंचाई के साधन के अभाव में हर साल खेती में घाटा सहना पड़ता है।
अमनौर विधानसभा में राजपूत और यादव वोट निर्णायक
2011 की जनगणना के मुताबिक यहां 12.74 फीसदी मतदता अनुसूचित जाति के हैं। वही, इस विधानसभा में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 10 % है। इस विधानसभा में सबसे ज्यदा करीब 21 प्रतिशत राजपुत वोटर हैं, वहीं दुसरे स्थान पर यादव वोटर की संख्या करीब 16 प्रतिशत है।
महान स्वतंत्रता सेनानी बहुरियाजी से है मनौर की पहचान
अमनौर की पहचान सारण की लक्ष्मीबाई के नाम से प्रतिष्ठित महान स्वतंत्रता सेनानी वीरांगना रामस्वरुपा देवी बहुरियाजी के साथ ही वर्तमान दौर में तीन बार केंद्रीय मंत्री का दायित्व संभालने सहित भाजपा संगठन में अहम जिम्मेवारी संभालने वाले दिग्गज नेता राजीव प्रताप रुडी से है।
2015 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेता शत्रुघन तिवारी उर्फ चोकर बाबा ने जेडीयू उम्मीदवार कृष्ण कुमार मंटू को हरा कर यहाँ से चुनाव जीतने के कामयाब हुए थे। वहीं, 2020 के चुनाव में एकबार फिर से सिंह उर्फ मंटू बीजेपी के टिकट पर यहाँ से जीत हासिल करने में सफल रहे।
2025 देखने को मिलेगा कड़ा मुकाबला
वैसे तो यह सीट NDA का गढ़ माना जाता है, अबतक हुए तीन चुनावों में एकबार भी राजद को यहाँ जीत नहीं मिली है। लेकिन राजनितिक विश्लेषकों का मानना है कि 2025 (Amnour Election 2025) के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर NDA और INDIA में जोरदार टक्कर देखने को मिल सकती है।
